लखनऊ। संत गाडगे सेवा समिति ने लक्ष्मण मेला मैदान में आरक्षित दर्जे के मामले में धोबी समाज के साथ हो रहे दोहरे व्यवहार के विरोध के बहाने गत दिनों शक्ति प्रदर्शन में जलबा दिखाकर सारे राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनों को चैंका दिया है। इस कामयाब धरना प्रदर्शन ने समिति के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार राना को प्रदेश के एक बड़े सामाजिक नेता के रूप में स्थापित किया है। जिससे उनके साथ संपर्क जोड़ने की बेताबी खासतौर से विभिन्न राजनैतिक दलों में नजर आने लगी है। कुछ ही महीनों की सक्रियता में संत गाडगे सेवा समिति ताकतवर जाति संगठन बनकर उभरी है। इसके प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार राना ने अभूतपूर्व सांगठनिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए हर जिले में धोबी समाज में मजबूत पैठ बनाने में कामयाबी पाई है। इसलिए इस संगठन के कार्यक्रमों में उमड़ने वाली भीड़ अब चर्चा का विषय बन चुकी है। गत दिनों इस सिलसिले को जारी रखते हुए राना ने धोबी समाज को आरक्षण दर्जे के धरातल पर बांटने की साजिश के विरोध का नारा देकर प्रदेश की राजधानी के लक्ष्मण पार्क मेला मैदान में जो जमावड़ा किया उसमें जुटी तादाद सभी राजनैतिक दलों का ध्यानाकर्षण कराने में सफल रही। इस बहाने राजकुमार राना ने साबित कर दिया है कि उन्हें धोबी बिरादरी को किसी ओर जोड़ने-मोड़ने की कुंजी हासिल हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के राजनैतिक चरित्र को देखते हुए इससे यह अनुमान लगाया जाने लगा है कि राजकुमार राना आने वाले दिनों में धोबी समाज के समर्थन की पूंजी के बूते राजनैतिक मैदान में बड़े खेल खेल सकते हैं। यह भांपकर अलग-अलग दलों के नेता उनसे संपर्क जोड़ने के लिए उत्सुक हो गये हैं। राजकुमार राना हालांकि इसे लेकर पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने संगठन को किसी राजनैतिक दल का बधुआं बनाने के पक्ष में नही हैं। उनका मुख्य ध्येय धोबी समाज को सशक्त बनाकर उसे दीनहीन दशा से उबारना है। इसमें जो पार्टी और लोग सहयोग करगें समाज उनका आभारी रहेगा।







Leave a comment