कोंच-उरई । सावन तीज जिसे हरियाली तीज के नाम से भी जाना जाता है, कल होगी। पर्व को लेकर विभिन्न मंदिरों में तैयारियां की जा रहीं हैं। मंदिरों और सनातनी घरों में भगवान के श्रीविग्रहों को मुख्य मंडपों से उठा कर झूलों में पधरवाया जायेगा। बैसे तो श्रावण तीज पर लगभग सभी मंदिरों में कार्यक्रम होते हैं लेकिन मुख्य आयोजन रामलला मंदिर में होगा। पखवाड़े भर चलने बाला झूलनोत्सव भी कल शाम से प्रारम्भ हो जायेगा जिसमें शास्त्रीय संगीत के जानकार अपनी राग रागिनियों से रामलला सरकार को रिझाने का उपक्रम करेंगे।

सावन तीज का त्योहार यहां सनातनी परंपरा से जुड़े घरों के अलावा मंदिरों में भी पूरे उत्साह और श्रद्घा के साथ मनाया जाता है। यहां के विभिन्न मंदिरों में विधि विधान के साथ बिशेष पूजा अर्चना होती है और भगवान के श्रीविग्रह मुख्य मंडपों से उठा कर झूलों में पधरवाये जाते हैं। पर्व को लेकर मंदिरों को सजाया संवारा जाने लगा है। कल शाम रानी झांसी के गुरुद्वारे रामलला मंदिर म बिशेष पूजा अर्चना के साथरामलला सरकार के मोहक श्रीविग्रह को झूले में पधरवाया जायेगा और मंदिर के एकादश गद्दीधर महंत रघुनाथदास ने उन्हें अपने हाथों से झूला झुला कर पखवाड़े भर चलने बाले झूलनोत्सव का श्रीगणेश करेंगे। झूलनोत्सव की खास बात यह है कि इसमें समीपस्थ और दूरस्थ क्षेत्रों के नामचीन संगीत बिशेषज्ञ अपनी राग रागिनियों की तान छेड़ेंगे। पंद्रह दिनों तक मंदिर के आंगन में राग रागिनियों और सुगम संगीत की ऐसी जुगलबंदी होगी कि लोग आनंद के सागर में गोते लगाते नहीं अघाते हैं।

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