कोंच-उरई । इलाके में प्रचलित अन्ना प्रथा किसानों के लिये भारी नुकसान का सबब बनी है, छुट्टा विचर रहे मवेशी किसानों के खेतों में खड़ी फसलों को उजाड़ देते हैं। इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को चेतावनी भी दी गई कि इन मवेशियों पर कारगर ढंग से अंकुश लगाया जाये लेकिन प्रशासन का मौन किसानों की मुश्किलें बढा रहा है। इस समस्या को लेकर आज एक बार फिर भारतीय किसान यूनियन ने कहा है कि आगामी 31 जुलाई को लखनऊ में आहूत महापंचायत में किसानों की अन्य समस्याओं के साथ यह मसला भी प्रमुखता में होगा।
भाकियू की मासिक पंचायत पिछले दिनों यहां गल्ला मंडी में संपन्न हुई थी जिसमें किसानों की स्थानीय लेबिल की तमाम समस्याओं के साथ उन समस्याओं को भी प्रमुखता से उकेरा गया था जो शासन या प्रशासन के नीतिगत फैसलों से जुड़ी हैं। मसलन, सभी किसानों के कर्जे माफ किये जाने, अगले पांच बर्षों तक बिना ब्याज ऋण दिये जाने, ऋणमाफी की समय सीमा मार्च 2016 से बढा कर दिसंबर 2016 किये जाने, निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली दिये जाने और संयोजन भी मुफ्त दिये जाने, स्प्रिंकलर सेट व तार फैंसिंग में पूरी छूट, मैंथा को फसल का दर्जा देने, स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने, फसलों के न्यूनतम मूल्य को लागत में पचास फीसदी लाभांश जोडक़र निर्धारित किये जाने, किसान आयोग का गठन किये जाने तथा पचनदा बांध शीघ्र बनवाने जैसी मांगें प्रमुखता से चर्चा में रहीं। इसके अलावा किसानों ने कहा कि आवारा जानवर उनके खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर देते हैं और किसान भी बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पुलिस प्रशासन गांवों में मुनादी करा कर आवारा पशुओं को बंद कराये जिससे किसानों की खरीफ की फसल बर्बाद होने से बच सके। अगर पशुओं के मालिक फिर भी न मानें तो उनके विरुद्घ दंडात्मक कार्यवाही की जाये। भाकियू के बड़े नेता डॉ. केदारनाथ सिमिरिया, रामलखन इटा और तहसील अध्यक्ष चतुरसिंह ने बताया है कि अपनी इस मांग को लेकर किसान यूनियन लखनऊ महापंचायत में ले जाने का पूरा मन बना चुकी है।






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