कोंच-उरई । यूपी सरकार द्वारा कर्जमाफी की घोषणा होने के बाद किसान तहसील की ओर दौड़ पड़ा है। बैंक शाखाओं द्वारा किसानों की जो सूचियां तहसील भेजी गईं हैं उनमें किसान अपना नाम ढूंढ रहे हैं। जिनके नाम सूची में हैं उनके चेहरे खिले हैं और जो सूची से बाहर हैं उनकी मायूसी साफ देखी जा सकती है। किसानों की इस स्थिति का फायदा भी तहसील कर्मी और लेखपाल खूब उठाने में लगे हैं। अंदर की बात तो यह है कि लेखपालों को किसानों से शपथ पत्र लेने और उनका सत्यापन कर बैंकों को भेजने पर लगाया गया है और लेखपाल भी मौके का फायदा उठाने में नहीं चूक रहे हैं। जो किसान ऋणमाफी के दायरे में आ रहे हैं उनसे वैरीफिकेशन के नाम पर सुविधा शुल्क बसूला जा रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत तो यह है कि किसानों को अभी तक यही नहीं मालूम कि उन्हें कौन से प्रपत्र दाखिल करने हैं, इस स्थ्ज्ञिति को भी खूब भुनाया जा रहा है।

चाहे सूखा हो या बाढ या फिर ऋणमाफी, किसान हर स्थिति में शोषण का शिकार होता रहा है। अब जब यूपी की योगी सरकार ने लघु और सीमांत किसानों की ऋणमाफी की घोषणा की है तो इसे भी तहसील में कमाई का जरिया बना लिया गया है। अव्वल तो किसानों को यही नहीं मालूम है कि उन्हें कौन कौन से प्रपत्र तहसील में देने हैं। गुरुवार को तहसील में किसानों का मेला सा लगा था जो या तो खतौनी विंडो पर लटकी दिखी या फिर नोटरी के बस्ते पर। खतौनी विंडो के आसपास पसरी बेतहाशा गंदगी मोदी के स्वच्छ भारत की तस्वीर को बदरंग करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। हालांकि तहसीलदार सतीश चंद्र वर्मा ने किसानों को साफ बता दिया है कि शपथ पत्र के साथ केवल आधार ही लगाना है लेकिन लेखपाल हैं कि किसानों को परेशान करने में लगे हैं। शपथ पत्र के साथ वे खतौनी भी मांग रहे हैं, वह भी तहसील की विंडो से निकाली हुई। इसके अलावा लेखपाल किसान के नाम के वैरीफिकेशन के नाम पर भी किसानों का आर्थिक शोषण करने में लगे हैं और किसान इसलिये उनके शोषण का शिकार हो रहे हैं कि उनके खाते में एक लाख आना है। यहां गौरतलब यह भी है कि शासन से जो दिशा निर्देष आये हैं उनमें नोटरी शपथ पत्र की अनिवार्यता का उल्लेख भले ही नहीं है लेकिन एसडीएम सुरेश सोनी ने बताया है कि शपथ पत्र आवश्यक है। बहरहाल, यहां नोटरी शपथ पत्र अफरात में बनने के कारण तहसील और स्टाम्प वैंडरों के पास दस रुपये के स्टाम्पों और टिकिटों का टोटा पड़ गया है।

 

Leave a comment