
कोंच—उरई । सनातन धर्म में जहां देवी देवताओं की पूजा बड़े ही श्रद्घा और भक्ति के साथ की जाती है वहीं भगवान आशुतोष शंकर के आभूषण नागों की पूजा भी श्रद्घा और आस्था के साथ करने की पुरानी परंपरा है। शुक्रवार को नागपंचमी के अवसर पर महिलाओं ने भारी संख्या में नागमंदिरों और बांबियों पर जाकर नाग देवता का पूजन किया और मन्नत मांगी कि कभी उनकी अकाल मृत्यु न हो। सडक़ों गलियों में घूमते नाथों ने लोगों को नाग दर्शन कराये और दक्षिणा प्राप्त की, महिलाओं ने नागों को दुग्धपान कराया।
सनातनी परंपरा में नागपंचमी का बहुत ही महत्व है, चूंकि नाग देवता भगवान शंकर के प्रिय आभूषण हैं सो आज के दिन उनकी पूजा का विधान है। यहां महंतनगर स्थित नाग मंदिर में आज सबेरे से ही नाग पूजा के लिये महिलाओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। महिलाओं ने विधि विधान से नागों की पूजा की और सत्तू से बनाई गई नागों की आकृतियां उन्हें समर्पित की। बाग बगीचों में स्थित बांबियों पर जाकर भी पूजा अर्चना की गई। महिलाओं ने नाग देवता से कामना की कि उनके घरों पर वे अपनी कृपा दृष्टिï बनाये रखें और अकाल मृत्यु से उनकी तथा उनके परिवार की रक्षा करें। आज गली मुहल्लों सपेरों की भी अवागच्च खूब रही, लोगों ने नागों के दर्शन किये, महिलाओं ने नागों को दूध पिलाया और सपेरों को दक्षिणा दी। नागपंचमी पर तमाम विद्वान पंडितों ने कालसर्प योग से ग्रसित जातकों के लिये पवित्र सरोवरों और तालाबों के तट पर बिशेष अनुष्ठान कर कालसर्प योग के शमन के लिये भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की। नाग देवता की पूजा के साथ ही यहां महंत की शाला में सत्तू खाने की भी पुरानी परंपरा है, सो महिलाओं ने वहां बैठ कर सत्तू खाकर परंपरा का तो निर्वाह किया ही, हल्की फुल्की पिकनिक का भी आनंद लिया।








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