उरई ।
उप कृषि निदेशक की सह पर विभाग के राजकीय बीज गोदाम प्रभारियों के सहयोग से किसानों को उन्नति किस्त की बीज किटों में फर्जीबाड़े का खुलासा होने के साथ-साथ ही गोदाम प्रभारी द्वारा किसानों को निःशुल्क वितरण के लिये आये बीज को बाजार में बेंचकर किसानों को लाभ से बंचित कर दिया। इतना ही नहीं जब मामले की जानकारी ऐसे किसानों को पता चली जिनके नाम बीज किट वितरण में दर्ज तो कर लिये गये लेकिन उन्हें बीज किट देने के नाम पर एक दाना तक नसीब नहीं हुआ। मामले के तूल पकड़ने के साथ ही उप कृषि निदेशक अब मामले को दबाने में जुट गये हैं।
मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2015-16, 2016-17 में राजकीय कृषि बीज भंडार रामपुरा व माधौगढ़ के प्रभारी द्वारा किसानों को खरीफ व रबी सीजन में चना, मसूर, मटर, राई, तिल, उर्द, मूंग, बाजरा, धान, मक्का आदि बीजों के खंड प्रदर्शन की किटों का वितरण निःशुल्क कराया जाता है ताकि उक्त उन्नतिशील बीजों की बुबाई अपने खेतों में करके जिंसों की अच्छी पैदावार कर लाभ उठा सके। लेकिन खंड प्रदर्शनों में भी अच्छा खासा खेल किया गया। इतना ही नहीं राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी रामपुरा व माधौगढ़ ने कागजों में फर्जीबाड़ा करके लाखों रुपये का गोलमाल कर उक्त बीज किटों के बीज को बाजार में बिक्री करवा दी। जब उक्त मामले की जानकारी क्षेत्रीय किसानों को पता चली कि उनके नाम से बीज किट वितरण में हुयी घपलेबाजी से आबाक रह गये तो अनेकों किसानों ने मामले की लिखित शिकायतें करनी शुरू कर दी। उक्त मामले में जब तूल पकड़ना शुरू किया तो उप कृषि निदेशक अनिल पाठक सकते में आ गये और फिर उन्होंने अपने कुछ विभागीय खासमखास कर्मियों को मामले को दबाने में लगा दिया है। वहीं बीज किट वितरण में हुये फर्जीबाड़े में बगैर लाभ के उनके नाम दर्ज किये जाने से किसानों में आक्रोश गहराने लगा था।





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