
उरई। शिक्षा व्यवस्था मेें सुधार व एसएमसी सशक्तीकरण को लेकर सामाजिक संस्था ग्रामीण जीवन विकास प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान व प्रयासजन उत्थान समिति द्वारा जिले शिक्षा व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन की सिफारिश की है।
समाजसेवियों के बीस सदस्यीय ग्राउंड लेबिल पैनल में अलग-अलग गांव में सामुदायिक सदस्यों, एसएमसी मेम्बर, पंचायत सदस्य, अभिभावक, व बंचित समुदाय के लोग शामिल थे। जिनके द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट गणेशधाम उरई में आयोजित कार्यक्रम में पेश की गई। इस पैनल में अनीता, बबलू देवी, विमलकुमार, धनेश कुमार, धर्मपाल, कृष्ण कुमार, नंदकुमार, प्रीति देवी, पंचम सिंह, राजेश गौतम, राजेश्वरी गौतम, रेहाना मंसूरी, राजकुमार, गीता देवी, रमेश चंद्र, सुरजीत सिंह, संजय कुमार, संजय बाल्मीकि, शक्ति सिंह शामिल थे जिन्होंने 16 बिंदुओं के जरिये शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने का सुझाव दिया। कार्यक्रम में समर्पण जन कल्याण समिति से राधेकृष्ण श्रीवास, बुंदेलखंड शिक्षा का अधिकार फोरम के अलावा अरविंद पहारिया, भग्गूलाल बाल्मीकि, प्रमोद गौतम, कमलेश बौद्ध, शीलिमा, नीलिमा, सलौनी, कृष्ण कुमार, रामकुमार ने गांव की शिक्षा व्यवस्था पर विस्तारण् से जानकारी दी। शिक्षा विभाग से जिला समन्वयक विजय कुमार शास्त्री ने बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रयाग जन उत्थान समिति के संयोजक कुलदीप कुमार ने किया। पैनल सदस्यों ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए जो सिफारिशें की है उनके अनुसार सभी सरकारी नौकरी करने वालो के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाया जाए, निष्क्रिय हो चुकी एसएमसी का पुनःगठन किया जाए, विद्यालय बजट के प्रति एसएमसी को प्राप्त कराई जाए, शिक्षकों की नियुक्ति छात्र-छात्राओं के नामांकन के अनुपात पर आधारित हों। जाति व लिंग के आधार पर भेदभाव खत्म किया जाए, बाल्मीकि व अनुसूचित जाति के व्यक्ति को ही रसोइया नियुक्त किया जाए, विद्यालय भवनों की मरम्मत के साथ ही चहार दीवार बनाई जाए, मिडडेमील में मां समिति के सदस्यों को भोजन परोसने की बारी-बारी से जिम्मेदारी दी जाए, जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में ही विद्यालयों में पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाए, विद्यालय में खेलकूद सामग्री के सापेक्ष बिजली पानी के व्यवस्था की जाए और जूनियर कक्षा तक के सभी प्राइवेट विद्यालयों की मान्यता खत्म की जाए।






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