
उरई । बुंदेलखंड के किसानों के लिए कर्ज माफी के ऐसे अलग और तर्क संगत मानक को लागू कराने के लिए एम एल सी रमा निरंजन ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर विधायी दबाब बनाया है जिससे सत्ता सदन में बौखलाहट और असमंजस का चुनौतीपूर्ण माहौल दरपेश हो सकता है ।
दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के पूरी तरह जुदा जमीनी माहौल की वजह से दोनों जगह के किसानों की आमदनी में कम से कम 5 गुना अन्तर है फिर भी योगी सरकार ने कर्ज माफी के लिए सब धान बाईस पसेरी तौलने का काम कर दिया है ।
कर्ज माफी केवल लघु और सीमांत किसानों के लिए तय की गई है । पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 5 एकड़ के किसान इसके दायरे में आयेंगे लेकिन उनके मुकाबले एक बटा पाँच मात्र इन्कम होने के वाबजूद बुंदेलखंड में यह सीमा 25 एकड़ रखने से योगी सरकार मुँह चुरा बैठी है । बुंदेलखंड के दूसरे माननीय कौन सरकार से बैर ले यह सोच कर अपने किसानों के साथ साफ़ दिख रही नाइंसाफ़ी पर चुप्पी साध गए पर रमा निरंजन से यह नहीं हो सका । उनका एक तारांकित प्रश्न अगले सत्र के लिए सूचीबद्ध हुआ है जिसका आशय सरकार को यह जवाब देने के लिए मजबूर करना है कि क्या वह वस्तुस्थिति के अनुरूप बुंदेलखंड में 25 एकड़ तक की हैसियत वाले किसानों की कर्ज माफी के लिए रजामंदी देगी । उनके पास विभिन्न वर्षों में प्रदेश के अलग –अलग इलाक़े के किसानों की आमदनी के सर्वे की आधिकारिक रिपोर्टें हैं जिनसे मुकरना सरकार के लिए आसान नहीं होगा । बहरहाल पूरी सरकार उनकी पहल के बाद असमंजस में है जबकि बुंदेलखंड में 25 एकड़ तक की हैसियत वाले किसानों के मन में लड्डू फूट रहे हैं कि काश रमा निरंजन के सवाल के उत्तर के माध्यम से सरकार उनके मानक पर सकारात्मक ऐलान कर यहाँ के किसानों का दिल जीतने के लिए अपने को तैयार कर ले । रमा निरंजन के प्रयास की जानकारी उनके प्रतिनिधि राम प्रकाश निरंजन ने आज स्थानीय लोक निर्माण निरीक्षण गृह में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी । इस दौरान एम एल सी के गत 23 जून के सदन में शिक्षकों के स्थानांतरण में अनियमितता को ले कर सदन में किए गए सवाल पर तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कमलेश ओझा के निलंबन की परिणति चर्चा का विषय इस संदर्भ में रही कि रमा निरंजन के द्वारा उठाये जाने वाले मुद्दे इतने कारगर होते हैं कि उनका इंपेक्ट दिखाई पड़ना लाजिमी है । कर्ज माफी के संदर्भ में भी उनकी इस विशेषता का शायद अपवाद नहीं होगा ।






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