उरई। बेहयाई से बाज आओ , गुनाहों से तौबा करो और रसूले करीम हजरत मुहम्मद के वफ़ादार बन कर अमन इंसानियत वाली जिंदगी गुजारो ।

ये नसीहतें प्रमुख इस्लामी  विद्वान और दारुल खैर फफूंद शरीफ के प्रतिनिधि मुफ़्ती अन्फ़ासुल हसन चिश्ती ने यहाँ हुसैनी चौराहा , तिलक नगर में बेहद गरिमामयी  बुखारी शरीफ के महाना दर्स के जलसे को खिताब करते हुए दी । हुजूर मुफ़्ती साहब ने कहा रसूले करीम से कल्बी जुड़ाव का नाम ईमान है , रसूले करीम की अदाओं का नाम इबादत है । गर कोई अल्लाह के नबी , प्यारे आका के इश्क से खाली हो कर  इबादत का प्रयास करता है तो वे क्रियाएँ फ़क़त दिखावा होंगी । रसूले करीम की जिंदगी इंसाफ परवरी , संवेदनाओं की रक्षा , अमन और नैतिकता का का आइना है , हम अगर इस साँचे में ढाल जाएँ तो दुनियाँ नफ़रतों की लहर से बच जायें ।

अल्लाहताला ने हजरत मूसा को बताया कि जब बंदों से वो नाराज होता है तो बंदों पर जालिम हाकिम बैठा देता है । मुफ़्ती साहब ने आव्हान किया कि अल्लाह की नाराजगी को महसूस करके तौबा करो , बदअमली से बाज आओ। वो ही सारी हुकूमतों , सारे निजामों से बढ़कर है और वो ही रहमतों के दरिया तुम पर नाजिल कर सकता है ।

जलसे में सवाल जवाब सत्र में अवामी सवालों का जवाब मुफ़्ती साहब ने दिया । हाफिज जुनैद चिश्ती , अब्दुल सलाम अंसारी राही ने नातया शेर सुनाये । सैयद तौसीफ चिश्ती, जिकरल  रहमान ( हाजी जी ),  हाफिज मंजर बरकाती , सिराजुल हक मामू , मुहम्मद मुही आज़म , मास्टर इरशाद , अकील अहमद , जमाल छोटू बैटरी , ताजुउद्दीन चिश्ती , सखावत मंसूरी , फ़सीउद्दीन आदि मौजूद रहे ।

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