कोंच-उरई। राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान के तहत शासन द्वारा जिले में नौ गांवों को ओडीएफ किया जाना है जिनमें कोंच तहसील के दोनों ब्लॉकों कोंच एवं नदीगांव में ग्राम पंचायत तूमरा के खकल गांव का चायन किया गया था जिसमें पिछले पांच दिनों से वालंटियर्स की टीमें घर घर जाकर पुरुषों एवं महिलाओं को जागरूक करने में लगी रहीं कि भारत को खुले में शौच मुक्त बनाने में उनकी क्या भूमिका है। पांच दिन तक चले अभियान के बाद आज इसका भव्य समापन हो गया जिसमें ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर के लोगों ने सहभागिता कर देश के प्रधानमंत्री के इस अति महत्वाकांक्षी मिशन को कामयाब बनाने की अपील की। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को लेकर जिले के नौ गोवों में से एक खकल में आज सरकारी स्कूल में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता ग्राम प्रधान जितेन्द्र पांडे ने की एवं संचालन राजीव रेजा ने किया। मंचस्थ अतिथियों कोतवाल कोंच सत्यदेव सिंह, एडीओ पंचायत गिरिजा शंकर निरंजन तथा सचिव मनीष कुमार ने ग्रामीणों का आह्वान किया कि गांव को खुले में शौच से मुक्त करना है जिसमें गांव के प्रत्येक व्यक्ति की अहम् जिम्मेदारी है। वे न तो खुद खुले में शौच जायें और दूसरों को भी ऐसा करने के लिये प्रेरित करें। ग्राम प्रधान पांडे ने बताया कि गांव में 126 परिवार हैं जिनमें से 60 घरों में शौचालय बन चुके हैं और 15 में निर्माणाधीन हैं, शेष आधा सैकड़ा घरों में भी पखवाड़े भर में शौचालय निर्मित हो जाने की उम्मीद है। उन्हें इस बात की प्रसन्नता है कि उनका गांव ओडीएफ होने से बस कुछ ही दूर है और समय रहते यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया जायेगा। इस मंच के माध्यम से पांच लाभार्थियों रामसिंह, हरीराम, मंजू, निर्मला तथा विजयसिंह को छह छह हजार के चेक प्रदान किये गये। अवशेष लोगों को भी जल्दी ही चेक उपलब्ध करा दिये जायेंगे। इस दौरान रामकिशोर वर्मा, रोहित गुर्जर, संदीप यादव, शैलेन्द्रकुमार, विपिन गुर्जर, राममिलन, धु्रव, रामजी, शिवम द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
इन टीमों ने घर घर चलाया जागरूकता अभियान
गांव को ओडीएस बनाने के लिये ग्राम प्रधान जितेन्द्र पांडे सहित गांव के अन्य लोगों ने भी काफी मेहनत की जिसमें कमोवेश चार टीमें बनाई गई थीं। युवकों, बुजुर्गों, महिलाओं और किशोरियों को अलग अलग टीमों में स्थान देते हुये उनकी जिम्मेदारी तय की गई थी कि वे अपने अपने उम्र वय के लोगों या महिलाओं को घर घर जाकर खुले में शौच के दुष्परिणाम बतायेंगे और उन्हें शौचालय में ही शौच करने के लिये प्रेरित करेंगे। इसके अलावा सुबह शाम इन टीमों के लोग उन स्थानों पर भी मौजूद रहे जहां अक्सर शौच के लिये जाया जाता रहा, इन्हें जब भी कोई खुले में शौच जाता दिखता तो ये उन्हें उलाहना देते। इन टीमों में मनीष द्विवेदी, महेश, देवेन्द्र, शिवम द्विवेदी, आनंदकुमार, लोकेन्द्रसिंह, छोटेराजा, देवसिंह, रूपेश, संगीता, दीप्ति, दीक्षा, अनुराधा, रक्षा, रागिनी, दीपिका, वंदना, कुसुमा, निशा, निखिल, कौशल आदि शामिल रहे।
अभियान के बाद ही खुले बंद शौचालयों के ताले
यह भी कितना अजीब है कि कई घरों में शौचालय तो बनवाये गये थे लेकिन खुले में शौच करने की लोगों की आदत ने इन शौचालयों में तालाबंदी करा दी थी। गांव के बुजुर्ग भगवानदास बताते हैं कि गांव में कई शौचालय तालों में बंद थे लेकिन जब से खुले में शौचमुक्त का अभियान गांव में छेड़ा गया तभी से उन बंद शौचालयों को भी तालों से मुक्ति मिल गई है और अब घरों के लोग इनका इस्तेमाल करने लगे हैं।






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