उरई। कोंच तहसील के भेंड बस स्टैण्ड पर चल रहे शराब ठेका को हटवाने के लिए एमएलसी रमा निरंजन ने सख्त तेवर अपना कर प्रशासन के अधिकारियों के लिए सांसत के हालात पैदा कर दिये। समाजवादी पार्टी की विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन इन दिनों पूरे फार्म पर हैं। जिससे सरकार, प्रशासन से लेकर निहित स्वार्थी प्रभावशाली तत्व तक सभी हलकान हैं। ग्राम भेड़ में बस स्टैण्ड पर चल रहे शराब ठेके के कारण यात्रियों और ग्रामीणों को जलालत की स्थिति भोगनी पड़ रही थी। जिसकी शिकायतें मिलने के बाद रमा निरंजन के प्रतिनिधि आरपी निरंजन ने उनके हवाले से प्रशासन को ठेका हटाने के लिए खबरदार किया। लेकिन तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी सोनकर की अडंगेबाजी की वजह से टाल-मटोल होती रही। नये वित्तीय वर्ष की शुरुआत में जब आरपी निरंजन ने अधिक दबाव बनाया तो पूर्व जिलाधिकारी संदीप कौर के निर्देश के कारण उजागर तौर पर ठेकों के नवीनीकरण की अधिसूचना में भेड़ के ठेके का नाम गायब कर दिया गया। जिससे वे गफलत में आ गये। उनको बताया गया कि भेड़ का ठेका समाप्त कर दिया गया है। लेकिन मक्कार तत्कालीन डीईओ ने गुपचुप फिर वह ठेका उठा दिया। इस पर रमा निरंजन ने जिलाधिकारी से शिकायत की। जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने एसडीएम और सीओ को तत्काल मौके पर जाकर जांच करके आख्या प्रस्तुत करने को कहा। पर ठेकेदार से सैटिंग-गैटिंग के चलते एसडीएम ने 15 दिन बहानेबाजी में गुजार दिये। इसके बाद 30 जुलाई को उन्होंने रवा में जांच की तो उनके रवैये से यह साबित हो गया कि वे किस कदर ठेकेदार की बजाने पर आमादा है। उन्होनें ठेका हटवाने का समर्थन कर रहे ग्रामीणों को धमकाने की कोशिश की। जिसकी लोगों ने वीडियो क्लिप बना ली। यह रिकार्डिंग मिलने के बाद रमा निरंजन भड़क गईं। रमा निरंजन ने पुनः डीएम को अवगत कराया और एसडीएम की हरकत पर कड़ी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने डीएम को बताया कि ठेके कारण कई हादसे हो चुके हैं। 29 जुलाई को ही गुलाब सिंह की शराब पीकर छत से गिर जाने के कारण गंभीर हालत हो गई जिसका मरणासन्न हालत में ग्वालियर में उपचार चल रहा है। ऐसे में उन्होंने 3 सितंबर के बाद कभी भी भेड़ बस स्टैण्ड पर ठेका न हटने की हालत में हजारों समर्थकों के साथ धरना दे देगीं। उनके इस अल्टीमेटम से अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गये हैं। आरपी निरंजन का कहना है कि संघर्ष छेड़ने की नौबत आई तो वे भेड़ के ठेके तक ही सीमित नही रहेगें जिले भर में बस्तियों के पास खुले शराब ठेकों को हटवाने के लिए गांव-गांव जाकर संघर्ष करेगें। अब देखना है कि रमा निरंजन के इस रुख के बाद अपने बचाव के लिए प्रशासन किस तरह हाथ पैर चलाता है। क्योंकि जिलाधिकारी को अभिसूचना तंत्र से जो इनपुट मिल रहा है उसके मुताबिक इस मुददे पर खासतौर से जिले भर की महिलाओं का समर्थन रमा निरंजन को मिल रहा है और इसकी परिणति आंदोलन के लिए भारी लामबंदी के तौर पर सामने आ सकती है।






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