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Shyam Sundar Goyal | Last Modified – Aug 09, 2017, 01:03 AM IST

दस्यु सुंदरी फूलनदेवी के सरेंडर से एक दिन पहले एक स्थिति ऐसी आ गई थी जब फूलन की मौत होने वाली थी।

 

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एमपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने फूलन ने सरेंडर किया।

भोपाल. जिस दिन दस्यु सुंदरी फूलन देवी का सरेंडर होना था उसके एक दिन पहले मीडिया के सामने पुलिस ने एक ब्रीफिंग रखी थी जिसमें फूलन अपनी गैंग के साथियों के साथ शामिल हुई थी। उस दौरान एक वाकया ऐसा हो गया जब पुलिस और फूलन की गैंग ने एक-दूसरे की तरफ बंदूक तान दी और फायरिंग की नौबत आ गई थी। क्या था वह मामला…

(10 अगस्त को दस्यु सुंदरी फूलन देवी का जन्मदिन है। इस अवसर पर DainikBhaskar.Com आपको बता रहा है उन बातों के बारे में जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को हैं। उनके बारे में जानने के लिए टीम ने उरई-जालौन के जर्नलिस्ट केपी सिंह से बात की जो 1983 में फूलन के सरेंडर से एक दिन पहले प्रेस ब्रीफिंग में शामिल थे।)

-कीर्ति सिंह ने बताया कि फरवरी 1983 में फूलन देवी को भिंड के एमजेएस कॉलेज में सरेंडर करना था।
-उससे एक दिन पहले लहार के एक रेस्ट हाउस में मीडिया के सामने एक प्रेस ब्रीफिंग रखी थी जिसमें फूलन देवी अपनी गैंग के साथ शामिल हुई थी।
-पूरी प्रेस ब्रीफिंग में वह चुप-चुप से रही थी। वह किसी से कुछ भी नहीं बोल रही थी।
-उसी समय एक विदेशी फोटोग्राफर ने उसका फोटो खींचा तो फूलन ने उसके गाल पर थप्पड़ जमा दिया।
-इस बात से वहां मौजूद एसटीएफ के जवानों ने फूलन को मारने के लिए राइफल तान दी।
-इस पर फूलन की गैंग के एक साथी ने भी बंदूक उठा ली और वहां गोलियां चलने की नौबत आ गई।
-इस बात से भिंड के तत्कालीन एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी हक्के-बक्के रह गए।
-उन्होंने किसी तरह बात को संभाला और मामले को रफा-दफा किया।

फोटो खींचने पर इसलिए फूलन ने मारा था थप्पड़
-उस समय चंबल का नाम देश-विदेश में फेमस था। वहां के डकैतों का फोटो विदेशों में ऊंचे दाम पर बेचा जाता था।
-ये बात डकैतों को भी पता था और वह अपने फोटो की कीमत भी वसूलते थे।
-फूलन भी अपने फोटो की कीमत चाहती थी लेकिन बिना उसकी इजाजत के फोटो खींचा गया तो वह तैश में आ गई।

 

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