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dainikbhaskar.com | Last Modified – Aug 10, 2017, 08:47 AM IST

एमपी में आकर बैंडिट क्वीन फूलन सरेंडर से मुकर गई तो भिंड एसपी ने अपना बेटा जमानत के तौर पर सौंप दिया।

 

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उस समय के भिंड एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी ने फूलन को मनाने के लिए अपना बेटा तक बतौर जमानत दे दिया था

ग्वालियर. बैंडिट क्वीन फूलन देवी को सरेंडर के लिए उस समय भिंड के एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी ने तैयार किया था, लेकिन फूलन के साथ एमपी में ऐसी घटना हो गई, जिससे वह फिर से बीहड़ में कूदने को तैयार हो गई। इसके बाद तो एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने तुरंत अपने बेटे को फूलन देवी कौ बतौर जमानत दिया और कहा यकीन करो तो सरेंडर कर दो। इस घटना के कई महीने बाद फूलन ने भिंड में आकर सरेंडर किया।इस घटना से फूलन ने किया था सरेंडर से इनकार……

10 अगस्त को बैंडिट क्वीन फूलन देवी का जन्म यूपी में हुआ था। इस मौके पर dainikbhaskar.com इस सरेंडर से जुड़े कुछ पहलुओं को सामने ला रहा है।

यूपी के वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह बैंडिट क्वीन के सरेंडर के साक्षी रहे हैं। उन्होंने इस सरेंडर से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को सामने किया।

-सभी जानते हैं कि बैंडिट क्वीन फूलन ने 13 फरवरी 1983 को भिंड में सरेंडर किया था। लेकिन इस सरेंडर के लिए फूलन 1982 के अक्टूबर महीने में ही तैयार हो चुकी थी।

-उस समय भिंड के एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी थे। एसपी चतुर्वेदी का सीधा संपर्क उस समय के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के साथ थे। दोनों ने ही मिलकर सरेंडर की योजना तैयार की।

-एसपी चतुर्वेदी ने फूलन को तैयार किया और फूलन अक्टूबर 1982 को भिंड के ऊमरी गांव के पास आ गई। ऊमरी में भिंड पुलिस ने एक शांति कैंप तैयार किया था। इस कैंप में उन डकैतों को रखा जाता था, जो सरेंडर करते थे।

इस घटना से फूलन का मन बदला

-फूलन के साथ उसका विश्वासपात्र साथी मुस्तकीम का भाई मुस्लिम था। डकैत मुस्लिम पर उस समय 10 हजार रुपए का इनाम था।

-फूलन के सरेंडर के समय चंबल रेंज के डीआईजी एमडी शर्मा थे। एमडी शर्मा डकैतों के सरेंडर के खिलाफ थे। उन्होंने अपना एक मुखबिर ऊमरी थाने में भेजकर डकैतों की जानकारी ली।

  • इसके बाद एक एनकाउंटर में उन्होंने डकैत मुस्लिम का एनकाउंटर किया।

हालांकि मुस्लिम मरा नहीं, लेकिन उसके गोली लग गई। यह घटना सामने आते ही फूलन देवी भड़क गई और उसने सरेंडर करने से इनकार कर दिया। -फूलन को खतरा लगा कि वह भी एनकाउंटर में मार दी जाएगी। फूलन के इनकार से भिंड एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी परेशान हो गए।

दोबारा ऐसे सरेंडर के लिए तैयार किया फूलन को

-सबसे पहले तो भिंड एसपी चतुर्वेदी ने सीएम अर्जुन सिंह से कहकर भिंड रेंज के डीआईजी शर्मा को चंबल रेंज से हटवा दिया और फूलन को मनाने में जुट गए।

-फूलन नहीं मानी और वापस चंबल के बीहड़ में लौटने की बात करने लगी। एसपी चतुर्वेदी ने बहुत मिन्नतें की, लेकिन वह तैयार नहीं हुई, क्योंकि उसे अपने एनकाउंटर का डर लगने लगा।

-एसपी चतुर्वेदी ने अपना बेटा बतौर जमानत के तौर पर फूलन को दिया। इससे भी फूलन के तेवर ठंडे नहीं हुए। चूंकि यूपी पुलिस फूलन का एनकाउंटर करने के लिए तैयार थी इसलिए उसने एमपी में सरेंडर करने का मन बना लिया।

पांच महीने लेट किया सरेंडर

-बैंडिट क्वीन फूलन ने अक्टूबर 1982 की बजाय पांच महीने बाद 13 फरवरी 1983 को भिंड के एमजेएस कॉलेज में अपने साथियों के साथ समर्पण किया।

-सरेंडर के लिए उसके सामने स्वयं मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह आए और सरेंडर के बाद वह एमपी की ही जेल में रही।

  • फूलन का सरेंडर करवाने में आईपीएस अफसर राजेन्द्र चतुर्वेदी का महत्वपूर्ण रोल रहा था। उनके सीएम अर्जुन सिंह से मजबूत संपर्क थे और सरेंडर के बारे में प्रदेश के पुलिस मुखिया तक को जानकारी नहीं थी।

स्लाइ्डस में देखिए फूलन देवी के सरेंडर से जुड़े फोटोज…….

 

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