
उरई। संरक्षा नियमों के पालन की हकीकत जानने निकली टीम को जगह जगह खामियां मिली। इस पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई। हालांकि कोई बड़ी खामी नहीं मिली। टीम के निरीक्षण को लेकर स्थानीय अधिकारियों की सांसें थमी रही।
रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पश्चिम मध्य रेलवे (डब्लूसीआर) जबलपुर की इंटर रेलवे सेफ्टी आडिट टीम के मुख्य संरक्षा अधिकारी (सीएसओ) राजेश अर्गल की अगुवाई में पांच सदस्यीय दल ने उत्तर मध्य रेलवे(एनसीआर) के झांसी मंडल का दो दिवसीय दौरा किया। आज दौरे के पहले दिन झांसी मंडल के एडीआरएम विनीत सिंह के साथ डब्लूसीआर के मुख्य सिज्नल अभियंता एके मिश्रा, सीईएलई एनके सिन्हा, सीआरएसई एके जतारिया, सीपीटीएम जीपी मीना ने झांसी कानपुर ट्रैक का भीमसेन से झांसी तक का निरीक्षण किया। इस दौरान पामा लालपुर सेक्शन, मलासा पुखरायां सेक्शन व आटा उरई सेक्शन के बीच बने पुल, रेलवे गेट व स्टेशनों को बारीकी से देखा।
निरीक्षण के दौरान टीम ने संरक्षा से जुड़े यंत्रों को बारे में पूछताछ की। फायर सिस्टम के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात डिप्टी एसएस एमएल गौतम से पूछा कि सिस्टम कैसे चलाते है। किसी दिन यदि पैनल फेल हो जाता है तो ट्रेनों का आपरेशन कैसे करेंगे। उन्होंने सेफ्टी सामानों को देखा। जो सामान नहीं मिले, उसके लिए संबंधित अधिकारियों को फटकारते हुए कहा कि यह जरूरी सामान जल्द उपलब्ध कराए।
इस दौरान मुख्य संरक्षा अधिकारी ने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि रेलवे बोर्ड के आदेश पर यह क्रास चेकिंग की जाती है कि उनके आदेशों का हकीकत में पालन हो रहा है या सिर्फ कागजों में ही संरक्षा नियमों का पालन हो रहा है। उनके निरीक्षण में सिज्नल, इलैक्ट्रिकल जैसे कई विभागों के अधिकारी है, जो अपने अपने विभागों के सेफ्टी से संबंधित बिंदुओं की जांच कर रहे हैं। यहां जो भी मिलता है, उसके बाद डीआरएम लेबिल पर चर्चा होगी। इस दौरान एनसीआर व डब्लूसीआर जोन के अधिकारी एक दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। इसके पहले हमारी टीम ने फरवरी माह में इलाहाबाद मंडल का निरीक्षण किया था। क्योंकि साल में दो बार निरीक्षण करना अनिवार्य है। इसलिए हमारा दूसरे चरण का निरीक्षण हो रहा है। हम लोगों ने चमारी, कालपी, नान इंटरलाकिंग गेट, कम ऊंचाई के गेट (एलएचएस) को भी देखा। हालांकि कोई बड़ी सामने नहीं आई है। जो थोड़ी बहुत कमियां है, उसके लिए अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
इस दौरान झांसी के मंडल स्तरीय व स्थानीय अधिकारियों के अलावा आरपीएफ व जीआरपी जवान भी मौजूद रहे।
इमरजेंसी नंबरों को पर कराई बात
सेफ्टी टीम ने स्टेशन पर लगे इमरजेंसी नंबरों की बारीकी से जांच करने के उद्देश्य से मौके पर ही स्टेशन प्रबंधक से इमरजेंसी नंबरों को लगवाया। उन्होंने फायर स्टेशन का नंबर पर स्टेशन प्रबंधक से बात भी कराई। हालांकि उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि जहां पर आपरेटिंग पैनल है, वहां पर यह इमरजेंसी नंबर क्यों नहीं लिखे है।
अर्थिंग प्वाइंट बताने उल्टी दिशा में चल दिए एसएसई
वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) इलैक्ट्रिक पीडी निरंजन आज उस समय फंसते बचे, जब उनके सीनियर अधिकारी ने उनसे अर्थिंग प्वाइंट पूछ लिया। वह उन्हें अर्थिंग प्वाइंट बताने के लिए उल्टी दिशा में ले जाने लगे। तभी उनके एक अधीनस्थ कर्मचारी ने उन्हें टोकते हुए उन्हें सही दिशा में जाने को कहा। इस पर वहां मौजूद लोगों ने चुटकी ली, जब यहां आएंगे, तभी तो पता चलेगा कि कौन चीज है, कहां पर है। मालूम हो कि श्री निरंजन उरई हैड क्वार्टर पर रहने की बजाय कोंच में रहकर ही पूरा सेक्शन संचालित करते हैं।
उरई में भी लगेगा काल रिकार्डर
मुख्य संरक्षा अधिकारी राजेश अर्गल ने बताया कि ट्रेन संचालन के दौरान रेलवे गेटमैन तथा स्टेशन मास्टर के बीच एक प्राइवेट नंबर दिया जाता है, उसी के आधार पर गेट बंद किया जाता है। कई बार फाटक बंद न होने पर विवाद हो जाता है। दोनों कर्मचारी एक दूसरे की गलती बताकर पल्ला झाड़ लेते है। अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि अब काल रिकार्डर लगाया जाता है। ताकि दोनों कर्मचारियों के बीच रिकार्डिंग रहे। यह रिकार्डिंग सात दिन रहती है। उनके डब्लूसीआर जोन जबलपुर में यह व्यवस्था है। अब इसे उत्तर मध्य रेलवे झांसी मंडल में भी लागू करने की संस्तुति की जाएगी।





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