बुंदेलखंड की अन्ना पशु प्रथा और गौ रक्षा को लेकर थोथे गाल बजाने वाले तो देश भर में बहुत लोग घूम रहे हैं लेकिन यूपी के जनपद जालौन के डकोर गांव के रहने वाले पूर्व जमीदार ने इस मामले में सार्थक पहल करके यह दिखा दिया है कि इस मामले में लोग अगर मन से चाह लें तो समस्या से चुटकियों में निजात मिलना संभव है।
दूध देना बंद करने के बाद गौ माता को चारा खिलाने की क्षमता न होने की वजह से धर्म भीरू जनता तक उन्हें लावारिस छोड़ देती है। बुंदेलखंड में झुंड के झुंड गौ वंश भूख और प्यास से तड़पते चारों ओर दिखाई देते हैं। यह झुंड किसी खेत में घुस जाये तो खड़ी फसल का सफाया होते देर नही लगती। ऐसे में गौ मांस का पाप करने वाले कारोबारियों की पौ-बारह हो गई है। जिससे सामाजिक विद्वेष भी फैल रहा है। चुनाव के पहले से यह समस्या सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है जिसके निराकरण के लिए कई घोषणाएं भी की गईं लेकिन उनसे न तो गौ संरक्षण हो पाया और न ही फसलों की रखवाली। ऐसे में सच्चे गौ भक्त आगे आकर मिसाल कायम कर रहे हैं। जिनमें डकोर के पूर्व जमीदार कुलदीप सिंह यादव भाईजी का नाम भी शामिल हो गया। भाईजी ने पिछले मार्च के महीने में गांव में भटकती लगभग 400 गायों को इकटठा करके उनके लिए बीहड़ में एक बड़ा बाड़ा बनवा दिया। इसमें चारा-पानी की व्यवस्था पहले उन्होंने अपनी ओर से की बाद में दूसरे गांव वाले भी इसमें हाथ बंटाने लगे। लगभग 18 गौ सेवक भी उन्होंने इस बाड़े में नियुक्त किये हैं जो बरसात के बाद इनको आसपास बीहड़ में ही हरा चारा चरवाने के लिए ले जाते हैं। भाईजी ने एक पशु चिकित्सक को भी अनुबंधित कर लिया है जो किसी गाय की बीमारी की सूचना मिलते ही तत्काल तलब हो जाता है। इसलिए जब से यह बाड़ा संचालित हो रहा है इसमें एक भी गौ वंश की मौत अभी तक नही हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि बाड़े में बंद कई गायें दूध भी दे रही हैं लेकिन इसके बावजूद उनका दूध नही दुहा जा रहा। भाईजी का कहना है कि उन्होंने यह गौशाला व्यापार करने के लिए नही बनाई है इसलिए उन्होंने हर माता का पूरा दूध उसके बछड़े को ही पीने देने का निर्देश गौ सेवको को दे रखा है। हालांकि इस बीच कई प्रमुख लोग गौशाला देखने आये जिसके बाद भाईजी इस पर सहमत हो गये हैं कि गायों का अतरिक्त दूध इकटठा कर घी और शुद्ध मटठे की बिक्री का इंतजाम भी आगे गौशाला में करेगें तांकि और बेहतर ढंग से गौ माताओं की सेवा के लिए संसाधन जुटाये जा सकें। इसके अलावा गौ मूत्र संग्रहण व गोबर संग्रहण की भी बिक्री के लिए व्यवस्था का विचार हैं। जिसमें कई विशेषज्ञों ने अपनी निःशुल्क सेवा की पेशकश की है।







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