उरई। जब कोई मर्ज बार-बार हो और उपचार के बावजूद उसकी पुनरावृत्ति थमती न दिखाई दे तो एचआईवी टेस्ट कराना चाहिए। प्रारंभिक स्तर पर एचआईवी टेस्ट होने पर इसकी आसानी से रोकथाम की जा सकती है। यह बात जिला क्षय रोग एवं एडस नियंत्रण अधिकारी नुरूल हुदा ने डीवी काॅलेज में एनएसएस की चारों इकाईयों के एडस निवारण कार्यक्रम में बताई। उन्होंने कहा कि जुखाम, खांसी जैसे मर्ज का लगातार दोहराव भी एडस की निशानी हो सकता है। प्राचार्य डाॅ. राजेश पांडेय ने इस अवसर पर कहा कि संयम प्रकृति का सबसे बड़ा धर्म है और एडस जैसी बीमारी संयम से डिगने के पाप की वजह से ही होती है। डाॅ. गिरीश श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। डाॅ. मनोज श्रीवास्तव, डाॅ. मलिखान सिंह, डाॅ. नगमा खानम ने भी एडस के बारे में कई नई जानकारियां छात्र-छात्राओं को बताईं। डाॅ अखिलेश गुप्ता, डाॅ. सुरेश चंद्र गुप्ता, डाॅ. मनोज वर्मा, डाॅ. लक्ष्मी गुप्ता, डाॅ. सुरेंद्र यादव, डाॅ. उमेश सिंह पाल, डाॅ. राजेश पालीवाल, डाॅ. अक्षरा मिश्रा आदि भी उपस्थित रहे।

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