उरई। सरकारी धन को बिना काम कराये उदरस्थ करने का एक मामला प्रकाश में आया है। राष्ट्रीय कृषि सतत मिशन योजनांतर्गत किसानों को पाइपों, इंजन और भूसाघर निर्माण जैसे कार्यों के लिये सरकारी अनुदान का प्रावधान है। तहसील क्षेत्र के कमोवेश तीन गांवों में इस तरह का घपला पकड़ में आया है कि बिना काम कराये ही लगभग सवा करोड़ के भुगतान निकाल लिये गये हैं। यह खुलासा आज झांसी से आई अधिकारियों की टीम द्वारा की गई जांच के बाद सामने के बाद विभाग में हड़कंप मचना शुरू हो गया है। जब उक्त संबंध में जालौन नगर में स्थित कार्यालय में जानकारी करने का प्रयास किया तो जिम्मेदारी अधिकारी अपना मुंह खोलने को तैयार नजर नहीं आये।

मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय कृषि सतत मिशन योजना के तहत सरकारी धन को उदरस्थ किये जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आने के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप की स्थिति है। अगर इसकी पाई पाई जांच होती है तो कईयों की गर्दनें नपना तय है। बताया गया है कि तहसील क्षेत्र के तीन गांवों चमरसेना, भदारी व बरोदा खुर्द में इस योजना के तहत 136 किसानों को लाभान्वित किया गया था जिसमें उनके खातों में पैसा आया भी और खाते में से ऊपर ही ऊपर निकल भी गया। जब इन किसानों को इसकी भनक लगी तो इसकी शिकायत ऊपर लेबिल पर की गई। इसकी जांच करने आज संयुक्त कृषि निदेशक झांसी शिवदत्त तिवारी, उप कृषि निदेशक हरीश सचान, टीओ संतोष कुमार और भूमि संरक्षण अधिकारी इंद्रसेन नाथ इन गांवों में पहुंचे। उन्होंने मामले की गहराई से छानबीन की है जिसमें एक बात तो साफ हुई है कि किसानों को योजना का लाभ नहीं मिला लेकिन सरकारी धन तकरीबन 1 करोड़ 26 लाख 18 हजार का आहरण किया गया है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस गोरखधंधे में किन किन की संलिप्तता है। कयास लगाये जा रहे हैं कि बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा घपला संभव नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जा रही है।

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