उरई। समाज में परम्परा के नाम पर आम आदमी खासकर महिलाओं के खुले में शौचमुक्त के प्रति जागरुक करने वाले टाॅयलेट एक प्रेम कथा ने ग्राम प्रधानों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया और उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि हर घर में शौचालय का निर्माण कराकर अपने-अपने गांव को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए वह कोई कसर नही छोडे़।
उल्लेखनीय है कि खुले में शौच करने की सनातनी प्रथा पर गहरी चोट करती टाॅयलेट एक प्रेम कथा को ग्राम पंचायत के सर्वेसर्वा प्रधानों को दिखाने के लिए जिलाधिकारी नरेन्द्र शंकर पांडेय के द्वारा अनूठी पहल की गई थी। आज यहां अर्चना टाकीज में जिले भर के 575 ग्राम प्रधानों को इस फिल्म को दिखाने के लिए बुलाया गया था। लोगों को शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित करने और गांव से लेकर पूरे जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए जिलाधिकारी नरेन्द्र शंकर पांडेय ने सिनेमाहाल पहुंचकर प्रधानों से इस सामाजिक बुराई का खात्मा करने का आवाहन किया और सरकार के द्वारा चलाये जा रहे खुले में शौचमुक्त अभियान को कारगर बनाने के लिए जनसामान्य को प्रेरित करने में प्रधानों का सहयोग मांगा। मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने खुले में शौच जैसे सामाजिक बुराई को मिटाने और बीमारियों को दूर भगाने के लिए इस अभियान के अंतर्गत हर घर में शौचालय निर्माण पर बल दिया। इस दौरान नगर मजिस्टेªट नत्थूप्रसाद पांडेय, जिला विकास अधिकारी पीएस चंद्रोल, जिला पंचायत राज अधिकारी राजबहादुर पटेल, खंड विकास अधिकारी महेबा लोकनाथ राजपूत, कुठौंद मनोज कुमार सिंह, गयाप्रसाद सिंह, एडीओ पंचायत अंगद सिंह कछवाह रामपुरा, छेदालाल दोहरे एडीओ पंचायत महेबा, एडीओ पंचायत संतोश गौतम, बलवीर सिंह सेंगर, धर्मनारायण मिश्रा तथा जिले भर के प्रधानों ने इस टाॅयलेट एक प्रेम कथा को देखा। हालांकि जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने भी हाॅल में बैठकर फिल्म को देखा।
मनुस्मृति पर भारी पड़ी टाॅयलेट की जंग
टाॅयलेट एक प्रेम कथा एक ऐसे नौजवान केशव एवं उसकी शिक्षित प्रेमिका जया जोशी की प्रेम कहानी है। जिसे ससुराल में पहले ही दिन सुबह महिलाओं की लोटापाटी के साथ खुले में शौच के लिए जगाया जाता है। इस दौरान लोटापाटी की महिलाओं इज्जत आबरू से किस तरह से खिलवाड़ की संभावनाएं रहती है उसे जया लोटा फेंककर लौट आती है। लेकिन केशव का पिता जो कि पक्का सनातनी ब्राम्हण है वह बेटा केशव बहू जया के द्वारा घर में शौचालय निर्माण को सामाजिक परम्परा के खिलाफ बताता है। गांव की पंचायत में जब केशव प्रधान से सार्वजनिक शौचालय का प्रस्ताव शासन को भेजने की मांग करता है तो गांव का सरपंच इसे मनुस्मृति के खिलाफ बताकर विरोध करता है। इस दौरान खुले में शौच करने वाली महिलाओं को व्यथा कथा को लेकर सनातनी व्यवस्था की जमकर धज्जियां उधेड़ता है। हालांकि टाॅयलेट को लेकर पत्नी जया के साथ उसके तलाक तक की नौवत पहुंच जाती है। मीडिया में शोर मचने के बाद सरकार जागती है और फिर केशव के गांव में शासन टाॅयलेट के निर्माण को मंजूरी दे देती है। इस तरह टेªन के सफर में टाॅयलेट से शुरू हुई इस प्रेम कहानी का समापन टाॅयलेट निर्माण की मंजूरी के साथ होता है।

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