उरई|मणि सेवा संस्थान की ओर से आयोजित गोष्ठी में सामाजिक कुरीतियों पर गहरा प्रहार किया। इसके साथ ही शिक्षा में आमूलचूल परिवर्र्तन की आवश्यकता बताई गई।

राम नगर स्थित संस्था कार्यालय में आयोजित शिक्षा और सामाजिक भेदभाव विषय पर आयोजित गोष्ठी में कैलाश यादव ने कहा कि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षित युवाओं व शिक्षकों को आगे आकर गरीब बच्चों की मदद करनी चाहिए, ताकि समाज का भेदभाव को दूर हो सके। मनोज चौधरी ने कहा कि समाज का जो बड़ा तबका हैं, वह अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है, जबकि उसे आकर गरीब तबके की मदद करनी चाहिए, ताकि समाज और शिक्षा में बराबरी आ सके।

संस्था अध्यक्ष कालूराम प्रजापति ने समाज के संगठन पर जोर देते हुए कहा कि सामाजिक बराबरी शिक्षा के प्रचार प्रसार से आ सकेगी। सभी को परस्पर मदद करनी होगी, ताकि किसी भी वर्ग में कोई अशिक्षित न रहने पाए। निदेशक केके सर ने प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाया और कहा कि शैक्षिक सत्र प्रारंभ हुए कई माह बीत जाने के बावजूद अब तक कई बच्चे प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकों से वंचित हैं, ऐसे में उनकी पढ़ाई विपरीत रूप में प्रभावित  हो रही है। प्रबंधिका राजेश्वरी शास्त्री ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि आजादी के 70  साल बाद सभी स्कूलों में दलित शोषित व पिछड़ी जाति के बच्चों के साथ भेदभाव किया जाता है। रिहाना मंसूरी, रीता देवी, रामकुमार, शिवराम पाल, मुकेश पाल, प्रमोद कुमार, विमल कुमार, राजकुमार, धर्मपाल, रमणीक आदि मौजूद रहे।

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