उरई। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की समन्वय समिति की वृंदावन मथुरा में हुई बैठक में भाजपा सांसदों और विधायकों के आचरण को लेकर जमकर प्रतिकूल टिप्पणियां हुई थीं जिससे तथाकथित माननीय सहम गये थे। उम्मीद थी इसके बाद माननीय दलालों से घिरे रहने की बजाय जनसेवी दायित्व का निर्वाह करने के लिए मजबूर होगें लेकिन बीत गई सो बात गई कम से कम जालौन जिले के माननीयों की बेफिक्री तो यही जतलाने वाली है। हालांकि भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र पांडेय की तरफ से जो संकेत मिल रहे हैं वे यह जतलाने वाले है कि इस स्थिति को बदलने के लिए वे न केवल सुधारात्मक अभियान चलायेगें बल्कि दंडात्मक कार्रवाईयां भी करेगें तांकि उदाहरण सामने रख सकें। भाजपा के माननीयों पर जो आरोप लग रहे हैं वे बेहद गंभीर हैं। पार्टी के अत्यंत प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ उनकी बेरुखी की तो इंतहा यह है कि एक पूर्व नगर अध्यक्ष के मौत के मुहाने पर खड़े बीमार भाई के लिए वे एम्स में फोन तक नही करा सके। यह अकेले पूर्व नगर अध्यक्ष के लिए नही पार्टी के हर आम कार्यकर्ता के लिए पीड़ा दायक नजीर है। लेकिन उससे अधिक गंभीर मामला यह है कि साबित हो या न हो लेकिन कोंच में पकड़े गये गौ मास को लेकर यह सर्व विदित हो गई है कि गौ वंश के वध के धंधे के तार भाजपा के जनप्रतिनिधियों से किसी न किसी रूप में अवश्य जुड़े रहे हैं। भाजपा के माननीयों द्वारा अवैध खनन कराने से लेकर सटटा खिलवाने तक की बातें गली-गांवों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। जिसे लेकर हर कोई कहता है कि बिना आग के धुंआ नही उठता। अवैध खनन के लिए मनमाफिक थानेदारों को नियुक्त कराने में एक जनप्रतिनिधि की शोहरत अपने निर्वाचन क्षेत्र में चरम सीमा पर खराब हो गई हैं फिर भी उन्हें सुधरना मंजूर नही है। स्थानीय निकाय चुनाव में मगरूर भाजपाई माननीयों की करतूतें पार्टी के लिए जहर बन सकती हैं। इसका इल्म प्रदेश के नये नेतृत्व को भली-भांति है। अब देखना यह है कि बिगड़ैल साड़ों को काबू में लाने के लिए नये प्रदेश अध्यक्ष आखिर कौन सी कड़वी दवा जिले को पिलवायेंगे।

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