कुठौंद-उरई । वन विभाग के अधिकारियों की करतूत से पेड़ बढ़ाने के कार्यक्रम को गति मिलने की बजाय उनके सफाये की रफ़्तार को गति मिल रही है । सपा सरकार द्वारा हरित क्रांति अभियान के तहत वन विभाग को वन चौकी प्रभाग नैनापुर के पुराने जंगल को उजाड़कर ऊबड़खाबड़ जगह को समतलीकरण कराकर नये सिरे से पौधा रोपण का लक्ष्य रखा गया था। पौधों की सिंचाई हेतु नलकूप भी लगवाये गए। लेकिन यह आयोजना भ्रष्टाचार के चलते सार्थक नहीं हो पायी ।
इसका पर्दाफाश वन विभाग के एक दैनिक भोगी पूर्व कर्मचारी ने शिकायती पत्र उच्चाधिकारियों को भेजकर किया । भेजे गए कई शिकायती पत्रों पर जब कार्यवाही नही हो सकी तो उचित माध्यम के द्वारा प्रमुख सचिव वन से शिकायत कर आरोप लगाया गया है कि नैनापुर वन विभाग भ्रष्ट अधिकारियों के गर्त में समा चुका है। मुख्यमंत्री भले ही भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने की बात कहकर श्वेत पत्र जारी कर रहे हो पर वन क्षेत्राधिकारी जालौन एवं वन दरोगा पर इसका कुछ प्रभाव नही पड़ रहा है। विकास खंड कुठौंद वन क्षेत्र नैनापुर में एक हजार हेक्टेयर भूमि को हरित पट्टिका बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट आवंटित किया गया था। जिसमें मात्र 50 से 60 हेक्टेयर भूमि में ही पौधे लगाए गए थे वो भी सूख चुके है। जिन वृक्षों को रोपित किया गया उन्हें बिना साफ सफाई के गड्ढो में लगा दिया गया जबकि इनके नाम पर लाखों का गोलमाल किया गया। इस हरित पट्टिका के प्रोजेक्ट में नौ बोरिंग करवानी थी बजट के प्रति लपलपाती जीभ के वशीभूत होकर मात्र पांच बोरिंग कराई गयी। जिनके चलाने के लिये विद्युत संयोजन न लेना और जनरेटर द्वारा पौधों की सिंचाई हेतु पानी निकालने की बात कहना हास्यास्पद है।







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