उरई । भारी भरकम बजट वाले बुंदेलखंड पैकेज के खर्च की जाँच करने वाले साहब मैनेज किए जाने की चर्चाओं के बीच बीमार हो गए और इसकी जानकारी उन्होने रिटायर होने के बाद दी । सवाल यह है कि इतनी अहम जाँच उस अधिकारी को दी ही क्यों गई जो रिटायरमेंट के करीब था । बहरहाल शासन ने नए जाँच अधिकारी की नियुक्ति का कर्मकांड करके निजात पा ली है । इस बीच लोग बुंदेलखंड पैकेज को भूल भी चुके हैं और जब तक नए साहब जाँच आगे बधायेंगे तब तक तो जो बीत गई सो बात गई का आलम हो जायेगा । भ्रष्ट सरकार के इन्ही कर्मों की वजह से योजनाओं के पैसे को राम नाम की लूट मान कर बेखौफ जेबें भरते हैं ।
| प्रारंभिक जांच में घोटाला
बुंदेलखंड में 2014-15 में विशेष पैकेज दिया गया था। इसके तहत चेकडैम निर्माण और कुंओं की खोदाई की योजना थी। 13वें वित्त आयोग और जिला योजना के तहत दो साल तक ये चेकडैम बनाए गए। इनके निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया था। कई जगह तो यह बात भी सामने आई कि चेकडैम के नाम पर कुछ पत्थर रख दिए गए और बोर्ड लगा दिया गया। सरकार ने इसकी जांच टीएसी(टेक्निकल एडवाइजरी कमिटी) से करवाई। जिसमें लघु सिंचाई विभाग के तत्कालीन सहायक अभियंता हमीरपुर अखिलेश कुमार और जेई कुलदीप कुमार, ब्रजेश कुमार राठौर, सूर्यनाथ और सुभाष चंद्र मौय को प्रथम दृष्ट्या दोषी पाया गया। अखिलेश कुमार अब लघु सिंचाई विभाग में आपूर्ति खंड लखनऊ के सहायक अभियंता हैं। अब एक महीने में रिपोर्ट टीएसी जांच पर सरकार ने इस साल 25 जनवरी को अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति के साथ मत्स्य विभाग के विशेष सचिव दीनानाथ गुप्ता को जांच अधिकारी नामित किया। दीना नाथ गुप्ता 30 जून को रिटायर हुए। उसी के साथ उन्होंने सूचना दी कि वह 11 मार्च से अस्वस्थ थे और अब 30 जून को रिटायर हो रहे हैं। इसके साथ ही जांच के आदेश सहित सभी कागजात वापस कर दिए। लघु सिंचाई विभाग की प्रमुख सचिव मोनिका एस गर्ग ने विभाग में ही झांसी के अधीक्षण अभियंता नरेंद्र कुमार चौधरी को जांच अधिकारी बनाया है। |







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