वाराणसी । प्रधानमंत्री को अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के समय शिक्षामित्रों के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा । सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद शिक्षामित्रों के स्थायी नौकरी के सुख की दुनिया अप्रत्याशित ढंग से उजड़ गई है फिर भी राज्य सरकार को उन पर कोई रहम नहीं आ रहा । चूंकि सपा ने उन्हे परमानेंट किया था जिसके कारण  योगी सरकार उन्हे सपा का आदमी के आदमी के तौर पर बरत रही है और नाउम्मीदी में वे अराजक हो चले हैं ।

 

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यूपी के शिक्षामित्र प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 से शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के पद पर समायोजन रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि टीईटी पास करने के बाद ही उन्हें भर्ती का मौका दिया जाएगा। तब से लगातार प्रदेश में शिक्षामित्र विरोध करते रहे। इस बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये करने की बात कही, लेकिन शिक्षामित्रों ने इसे ठुकरा दिया।

11 सितंबर से 15 सितंबर तक यूपी के शिक्षामित्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन किया था। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि प्रदेश सरकार से प्रस्ताव मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष गाजी इमाम आला के मुताबिक केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से बातचीत निराशाजनक रही। इसके बाद सभी एक लाख 60 हजार शिक्षामित्रों ने गिरफ्तारी भी दी थी। सुप्रीम कोर्ट में शिक्षामित्रों की तरफ से एक पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की गई है।

शिक्षामित्रों की मांग है कि राज्य सरकार भी इस मामले में उनकी तरफ से पैरवी करे और उनके समायोजन पर विचार करे। इसमें या तो समान मानदेय की बात मानी जाए या फिर टीईटी का पासिंग मार्क्स 60 के बजाय 45 प्रतिशत रखा जाए। इसके बाद केंद्रीय मानव संसाधन विभाग को प्रस्ताव भेजा जाए, क्योंकि प्रकाश जावड़ेकर ने वादा किया है कि राज्य सरकार से प्रस्ताव मिलते ही इसे पास कर दिया जाएगा। शिक्षामित्रों ने यह याचिका 22 अगस्त को दायर की थी।

 

Leave a comment

Recent posts