नागपुर । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आर एस एस की परम्परागत दशहरा रैली में आगाह किया कि अगर रोहिङ्ग्याओं को हमदर्दी दिखा कर देश में शरण देने की गलती की गई तो राष्ट्रीय सुरक्षा ख़तरे में पद जायेगी ।

इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी कई बातें कहीं। मोहन भागवत ने केंद्र सरकार से कहा है कि वे देश में आश्रय की मांग कर रहे रोहिंग्याओं पर निर्णय लेने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखें। भागवत ने कहा, “हम पहले से ही अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की समस्या का सामना कर रहे हैं और अब रोहिंग्या हमारे देश में घुसपैठ कर चुके हैं।” उन्होंने कहा कि रोहिंग्या को आश्रय देने से न केवल हमारी नौकरी पर दबाव बनेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा होगा।

कश्मीर मुद्दे पर भागवत ने कहा कि 1990 के दशक में कश्मीर घाटी से विस्थापित लोगों की समस्याओं को अभी भी सुलझाना जाना बाकी है। इसके लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन किए जाने जरुरी हैं। भागवत ने कहा, जाहिर तौर पर उन्हें अनुच्छेद 370 का दर्जा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम में भाजपा के एल के आडवाणी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी उपस्थित थे।

आरएसएस प्रमुख ने गौ जागरूकता के मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए कहा, “यह निन्दनीय है कि कुछ लोगों को कथित गोरक्षकों और गौतस्करों द्वारा मारा जा रहा है। भागवत ने कहा कि गाय संरक्षण का मुद्दा धर्म से परे है। आर्थिक स्थिति पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि छोटे, मध्यम उद्योगों और स्वयंरोजगार व्यवसायों के हितों को संरक्षित किया जाना चाहिए क्योंकि वे देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देते हैं। भागवत ने मुंबई भगदड़ में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

 

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