उरई ।

मुख्यमंत्री द्वारा घोषित स्थानांतरण नीति की जद में आये जनपद के विद्युत विभाग में पदस्थ अनेकों कर्मचारी स्थानांतरण होने के बाद भी अपनी कमाऊ पटलों का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने स्थानांतरित कर्मियों को अभी तक रिलीव नहीं किया तो वहीं कुछ कर्मियों को रिलीव भी कर दिया लेकिन वह नई तैनाती स्थल पर जाने को तैयार नहीं हैं। अब ऐसे स्वेच्छाचारी स्थानांतरित कर्मियों को कौन समझाये कि उनका स्थानांतरण मुख्यमंत्री की स्थानांतरण नीति के तहत किया गया था जो सालों से एक ही स्थान पर अंगद की तरह पैर जमाये हुये थे।

विद्युत विभाग से स्थानांतरित कर्मियों में संतोष कुमार विश्वकर्मा जो कार्यालय सहायक तृतीय के पद पर तैनात थे उनका स्थानांतरण विद्युत नगरीय वितरण मंडल झांसी के लिय हुआ है। जमीर अहमद कार्यालय सहायक तृतीय का भी स्थानांतरण विद्युत नगरीय वितरण मंडल झांसी के लिये हुआ है। तीसरे कर्मचारी अशोक कुमार वर्मा कार्यालय सहायक द्वितीय का भी विद्युत वितरण मंडल झांसी के लिये स्थानांतरण हुआ था। उक्त तीनों कर्मचारी सालों से अपने गृह जनपद में तैनाती पाये हुये थे। इसीक्रम में विद्युत वितरण खंड प्रथम (टी.जी. 2) में पदस्थ अब्दुल अजीम का भी स्थानांतरण विद्युत वितरण उपखंड उरई के टाउन के 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र करमेर रोड के लिये हुआ था। इन्हें तो कागजों में 8 सितंबर 2017 को कार्यमुक्त भी किया गया था लेकिन वह आज भी अपने पटल का कार्यभार संभाले हुये हैं। मजेदार बात तो यह है कि अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम ने अब्दुल अजीम जो टीजी-2 में बिल संशोधन का कार्य लंबे समय से करते चले आ रहे थे उनके स्थानांतरण आदेश में परिवर्तन कर दिया। लेकिन जैसे ही उक्त मामले की जानकारी अधीक्षण अभियंता किशन सिंह को पता चली तो उन्होंने एक्सईएन विद्युत वितरण खंड प्रथम को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने के निर्देश तक दिये थे। इसी प्रकार से स्थानांतरण नीति की जद में आयी सुषमी देवी श्रमिक विद्युत विकरण खंड प्रथम का स्थानातरण विद्युत वितरण उपखंड ग्रामीण में किया गया था उन्हें रिलीव करने का पत्र एक्सईएन प्रथम सुभाष सचान ने जारी कर दिया। लेकिन उन्होंने भी आज तक कार्यभार नहीं संभाला और पुरानी तैनाती स्थल पर योगदान दे रही हैं। इसीक्रम में आईए अंसारी का स्थानांतरण कार्यालय अधीक्षक विद्युत वितरण खंड प्रथम उरई से विद्युत वितरण मंडल उरई में कर दिया गया था। वह भी अपने पुराने पटल पर जमे हुये हैं। जबकि आईए अंसारी पर पूर्व के समय में वित्तीय अनियमिताओं के आरोप लगते रहे इसके बाद उन्हें यहां से हटा दिया गया था। लेकिन विभाग में शाम, दाम, दंड भेद की नीति पर चलने वाले स्थानांतरित कर्मचारी खुद को पॉवरफुल साबित करने में जुटे हुये थे। फिर चाहे उनकी इस तरह की कार्यशैली से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बनायी गयी स्थानांतरण नीति का ही उल्लंघन होता रहे उन्हें इससे कोई वास्ता नहीं रहता है। फिलहाल तो विद्युत विभाग के स्थानांतरित कर्मचारी जो सालों से विभाग में फैबीकॉल की तरह चिपके हुये है वह इसी तरह से गृह जनपद में चिपके रहेंगे या फिर नये तैनाती स्थान पर पहुंचकर कार्यभार संभालेंगे यह एक ऐसा सवाल है जिसका जबाब विभाग के जिम्मेदार अधिकारी देने में संकोच कर रहे थे।

 

 

 

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