कोंच-उरई । बीती रात रामलीला रंगमंच पर रामलीला के अभिनय विभाग द्वारा कृष्णावतार व कंस बध नाटक कीप्रस्तुति दी। सभी पात्रों ने अपने अपने किरदार के साथ जीने का प्रयास किया। अभिनय विभाग ने रंगकर्मियों सहित रामलीला के विभिन्न आयामों से जुड़े लोगों के प्रति आभार भी ज्ञापित किया।

रामलीला के 165वें महोत्सव के समापन के बाद रामलीला के अभिनय विभाग द्वारा बीती रात रामलीला के मंच पर कृष्णावतार व कंस बध नाटक का मंचन किया गया। कथानक के अनुसार क्षीर सागर में शेषशायी भगवान के समक्ष देवर्षि नारद आकर पृथ्वी पर बढते जा रहे कंस के अत्याचारों के बाबत निवेदन करते हैं तो भगवान श्रीहरि उनको आश्वस्त करते हैं कि वह शीघ्र ही अपनी सोलह कलाओं के साथ बसुदेव और देवकी के यहां अवतार धारण करेंगे। वचनानुसार सही समय आने पर वह अवतरित होते हैं और ब्रज में अपनी बाल लीलाओं से सभी ब्रजवासियों को आनंदित करते हुये अंत में कंस का बध कर देते हैं। कथानक में वसुदेव-देवकी के मध्य मार्मिक वार्ता, कंस और उसके राक्षसों के उत्पात, कृष्ण की बाल लीलाओं और सखियों संग रासलीला के दृष्टïांत दर्शाये गये। नाटक के किरदारों ने उम्दा करने का प्रयास किया। बिष्णु का अभिनय ओमप्रकाश उदैनिया, कृष्ण उत्कर्ष तपा, कंस नंदराम स्वर्णकार, बसुदेव प्रमोद सोनी, देवकी कैलाश नगाइच, उग्रसेन प्रेम चौधरी नदीम आदि ने निभायेे। सांकेतिक विभाग और उद्घोषक की कमान दिनेश मानव, भास्करसिंह माणिक्य, राजेन्द्र दुवे ने संभाल रखी थी। अभिनय विभाग के अध्यक्ष मोहनदास नगाइच ने अभार जताया। सीनरी विभाग ने दृश्यांकन करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रस्तुति के साथ ही रामलीला महोत्सव का विधिवत् समापन हो गया।

 

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