उरई । प्रदेश में किसी भी राजनैतिक दल की सरकार रहे लेकिन जनपद की राजनीति में मौरम का धंधा ही अहम होता है। जिस दल की प्रदेश में सरकारी बनती है उसी राजनैतिक दल के नेताओं की लालसा किसी भी तरह से मौरम कारोबार में जुटना ही रहता है। फिर चाहे उनके इस तरह के अवैध कारोबार से शासन की साख को बट्टा लगे या फिर जिला प्रशासन की बौना साबित करें, इससे उनका कोई वास्ता नहीं रहता है। ताज्जुब की बात तो यह है कि लाल सोने की लूट में अब प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता काफी सक्रियता से जुट गये है जो रात के अंधेरे में कोटरा क्षेत्र में पॉकलैंड मशीन को घाट तक ले जाते हैं और देखते ही देखते दो से ढाई सौ ट्रकों में मौरम भरवा कर रात में ही उनकी रवानगी करवा दी जाती हैं।
पिछले कुछ दिनों से कोटरा क्षेत्र के सिकरी व्यास, ठर्रा मौरम घाटों पर पूरी रात जहां पॉकलैंड मशीन की आवाज गूंजती रहती है तो वहीं मौरम माफिया लग्जरी वाहनों में इधर से उधर फर्राटा भरते रहते हैं। लाल सोने की लूट में शामिल लोग असलहों से लैस रहते हैं जिससे क्षेत्रीय लोग उनसे उलझने व विरोध करने का साहस नहीं जुटा पाते हैं। जहां तक सिकरी व्यास मौरम घाट की बात की जाये तो वहां पर दिन भर खाली ट्रकों की आमद होती रहती है और रात होते ही समीप के क्षेत्र में खड़ी की गयी पॉकलैंड मशीन बेतवा नदी के किनारे पहुंचकर पहले से खाली खडे ट्रकों में पलक झपकते ही मौरम भर कर उन्हें रवाना देते हैं । इतना ही नहीं मौरम माफिया कोटरा में बेतवा नदी पर बने पीपो वाले पुल से भी मौरम भरे ट्रकों की निकासी कराने से नहीं चूक रहे हैं। झांसी जनपद के ठर्रा मौरम घाट पर भी पूरी रात माहौल गुलजार रहता हैं। जहां ट्रक चालकों से मौरम भरवाने के नाम पर वसूली की जाती है तो वहीं उन्हें सुरक्षित कोटरा तक पहुंचाने की जिम्मेदारी का निर्वहन भी सफेदपोश मौरम माफिया करते हैं खास बात तो यह है कि जिस रूट से मौरम माफिया ट्रकों की निकासी करा रहे हैं उसमें खनिज विभाग का कोई बैरियर भी नहीं लगा हैं।







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