उरई । अन्ना पशु प्रथा पर प्रभावी अंकुश के लिए पहली बार मवेशियों को छुट्टा करने वाले ग्रामीणों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गंभीरता जिला प्रशासन ने दिखाई है ।

किसानों का मामला  होने से मवेशियों को अन्ना छोड़ने वाले  किसानों पर मुक़दमा दर्ज कराने की भभकी तो जिला प्राशासन देता रहता था लेकिन वास्तविक तौर पर मुक़दमा  दर्ज कराने की नौबत आने पर कतरा जाता था लेकिन अब महसूस किया गया है कि पानी सिर से ऊपर हो गया है तो इस चुनौती से मुक़ाबला करने के लिए जिला प्रशासन ने मैदान में कूदने की ठान ली है ।

जिलाधिकारी डॉ मन्नान अख्तर ने इसे ले कर किसान नेताओं से मंत्रणा की ।  किसान नेता भी इस समस्या से भरे बैठे थे । सभी ने कहा कि अन्ना पशु प्रथा इस कदर बढ़ गई है कि किसानों का रात दिन का सारा समय फसलों की निगरानी में ही बर्बाद हो जाता  है । फिर भी जिस दिन चूक हुई अन्ना मवेशी उनकी पूरी मेहनत चट कर जाते हैं । उन्होने कहा कि मवेशियों को छुट्टा छोड़ने वालों को जेल भेजें हम आप के साथ  हैं ।

किसान नेताओं का समर्थन मिलते ही जिलाधिकारी  ने आज लिखित फरमान जारी कर डाला कि कोई किसान चराने के लिए बिना रखवारे के पशु नहीं छोड़ेगा । जो इस हरकत से बाज नहीं आयेंगे उनके ख़िलाफ़ लेखपाल या पंचायत सचिव थाने में मुक़दमा दर्ज करायेंगे । प्रत्येक महीने समीक्षा बैठक होगी जिसमें अपर जिलाधिकारी हर तहसील में कितने मुक़दमे अन्ना पशु प्रथा के दर्ज हुए इसकी जानकारी उनके सामने पेश करेंगे । मतलब मवेशियों को अन्ना छोड़ने वालों के साथ अब कोई रियायत नहीं ।

 

 

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