उरई । बच्चे का अपहरण कर फिरौती वसूलने के आरोप में प्रधान सहित 8 को विशेष न्यायाधीश डकैती की अदालत ने शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें से तीन अभियुक्तों को कार्रवाई के लिए पहुँचे पुलिस दल पर जानलेवा हमला करने के आरोप में 5-5 वर्ष की अतिरिक्त सजा सुनाई गई । 12 लोगों पर यह केस चला जिनमें तीन को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया जबकि एक के ख़िलाफ़ विचारण अभी जारी है ।
गौरतलब है कि सन 2010 में 25 मई को जालौन कस्बे के बड़े सेठ दिलीप अग्रवाल के बेटे प्रतीक का अपहरण कर लिया गया था जिसमें 24 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी । बाद में पुलिस को विश्वास में ले कर फिरौती की रकम देने दिलीप अग्रवाल रामपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत करनखेड़ा मंदिर के पास जंगल में गिरोह से मिलने पहुँचे । पुलिस भी कार्रवाई के लिए आ गई थी लेकिन पुलिस ने जब बदमाशों को पकड़ना चाहा तो उन्होने पुलिस पर गोली चला दी जिस पर पुलिस ने भी मुक़ाबला किया । इस तरह मौके पर मौजूद बदमाशों को 24 लाख की रकम के साथ गिरफ्तार कर लिया गया । साथ ही प्रतीक भी सकुशल छूट गया ।
इस मामले का ट्रायल विशेष न्यायाधीश डकैती उमेश प्रकाश की अदालत में हुआ जिसमें आज सजा का ऐलान करते हुए उन्होने सुवीश उर्फ बड़े , देवेन्द्र कुमार याज्ञिक , अश्विनी , राजीव उर्फ लंबू , संजय , सौरभ , राहुल चौधरी और गोविंद को अपहरण के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई । गौरतलब है कि देवेन्द्र कुमार याज्ञिक महेवा ब्लाक के ग्राम लौना का प्रधान भी है । इनमें सुवीश , देवेन्द्र और अश्विनी को पुलिस मुठभेड़ के आरोप में 5-5 कारावास की सजा अतिरिक्त सुनाई गई । एक दर्जन आरोपियों में सुनील , लल्लू उर्फ मनवीर और सत्यवीर यादव को अदालत ने पर्याप्त सुबूत न होने के कारण दोषमुक्त कर दिया । एक अभियुक्त पर ट्रायल उसके अभी तक फरार होने की वजह से चल रहा है । प्रमोद कुमार वर्मा ने अभियोजन की ओर से पैरवी की ।





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