कोंच-उरई। बहुप्रतीक्षित पालिकाध्यक्ष पद का आरक्षण घोषत होते ही जहां अनुसूचित विरादरी के संभावित दावेदारों ने पटाखे फोड़ कर यह पद अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित होने का जश्न मनाया तो वहीं सवर्ण और पिछड़ी विरादरी के दिग्गजों के अरमान धुवां धुवां होकर बिखर गये। कोंच नगर पालिका परिषद् के डेढ सौ सालों का इतिहास अगर देखें तो पहली बार यह पद आरक्षण के लिहाज से अनुसूचित जाति के कोटे में गया है।
निकाय चुनाव को लेकर महीनों से तैयारियों में जुटे तमाम दिग्गजों के अरमानों पर पानी फिर गया है। लोगों को उम्मीद थी कि कोंच पालिकाध्यक्ष पद अनारक्षित या पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षित हो सकता है सो इसी लिहाज से संभावित दावेदार अपनी रणनीति बनाने में जुटे थे, यहां तक कि अपने मन माफिक सीट कराने के लिये कई दिग्गज लखनऊ में लगातार डेरा डाले रहे लेकिन अंततः बीती देर शाम जब आरक्षण घोषित हुआ तो उनके अरमानों पर मनों पानी पड़ गया। दूसरी तरफ अनुसूचित विरादरी में इस आरक्षण को लेकर खुशी की लहर दौड़ गई और देर रात तक आतिशबाजी करते हुये अपनी खुशी का इजहार भी किया। गौरतलब यह है कि पालिका के कमोवेश डेढ सौ सालों के इतिहास में कोंच पालिकाध्यक्ष पद पहली बार अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित हुआ है जिसके चलते अब यहां के बाशिंदों को नये अनुभवों से गुजरना पड़ेगा। इससे पहले बर्ष 1995 में आरक्षण व्यवस्था शुरू हुई थी लेकिन कोंच पालिकाध्यक्ष पद अनारक्षित रहा और अशोक शुक्ला चुनाव जीते, बर्ष 2000 में हुये चुनाव में फिर उन्होंने यह पद कब्जिया लिया और 2004 में उनकी हत्या हो गई थी। यह सिलसिला 2005 तक चला इसके बाद 2006 में हुये पालिका चुनाव में यह पद महिला के लिये आरक्षित कर दिया गया और शकुंतला तरसौलिया चुनाव जीतीं। वर्ष 2012 में हुये चुनाव में यह पद पिछड़ी महिला के लिये आरक्षित कर दिया गया और विनीता सीरौठिया ने चुनाव जीता। अनुसूचित जाति के लिये हुये इस आरक्षण के बाद अब कोंच निकाय के सियासी समीकरणों में ऊंट किस करवट बैठने जा रहा है, यह देखना बाकई दिलचस्प होगा।
वर्ष 1923 में बना पहला चेयरमैन
कोंच की नगर पालिका जिले की सबसे पुरानी नगर पालिका है, बर्ष 1867-68 में इसका प्रादुर्भाव हुआ था और शुरुआती दौर में अंग्रेज कलैक्टर इसके मुखिया हुआ करते थे, लेकिन बर्ष 1923 में महंत चतुर्भुज दास कोंच के पहले पालिकाध्यक्ष बने जो सिर्फ दो साल ही अपने पद रह सके। इसके बाद 1926 में नाथूराम शुक्ला चेयरमैन बने और यह भी दो साल अपने पद पर रहे। इसके बाद 1929 से 1932 तक महंत चतुर्भुज दास, 1933 से 1935 तक नाथूराम शुक्ला, 1936 से 1941 तक लक्ष्मण प्रसाद पाठक, 1942 से 1952 तक बाबू चित्तरसिंह निरंजन, 1953 से 1957 तक गणेश प्रसाद चतुर्वेदी, 1958 से 1962 तक केदारनाथ शर्मा, 1963 से 1967 तक श्रीधर दयाल आजाद चेयरमैन बने। किशोरीशरण शुक्ला, मुजीबुर्रहमान, अख्तर अली, राधेश्याम दांतरे आदि पालिकाध्यक्ष बने। इस बीच कई दफा कोंच पालिका को सुपरसीड भी किया गया।







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