कोटरा –उरई  । नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियों के बीच नगर पंचायत कोटरा में भी चुनावी हलचल बढ़नी शुरू हो गयी है। 1970 के पहले तक कोटरा ग्राम पंचायत थी। जहां से 1962 के पंचायत चुनाव में ईश्वर दयाल व्यास अंतिम बार प्रधान पर निर्वाचित हुये थे। तो वहीं 1989 में हुये निकाय चुनाव में मूलचंद्र बुधौलिया पहली बार नगर पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुये थे। वर्ष 2017 में होने वाले निकाय चुनाव में कस्बा वासी छठवें नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। खास बात तो यह है कि वर्ष 2007 में हुये निकाय चुनाव में मतदान को प्रभावित करने के लिये एक राजनैतिक दल के नामी गिरामी नेताओं व बाहरी तत्वों ने डेरा जमा लिया था। वह दृश्य आज भी नगरवासियों के जेहन में आ जाता है।

संभावित नगर निकाय चुनाव के लिये सीटों का परिसमीन घोषित होने के बाद से ही कस्बा कोटरा में चुनावी सरगर्मियांे में अचानक तेजी आ गयी। हर जगह जहां पर भी तीन-चार व्यक्ति खड़े होते है चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो जाता है। 1970 में शासन द्वारा ग्राम पंचायत कोटरा को नगर पंचायत का दर्जा दिया था। जबकि इससे पूर्व वर्ष 1962 में हुये पंचायत चुनाव में कोटरा ग्राम पंचायत से ईश्वर दयाल व्यास प्रधान पद पर निर्वाचित हुये थे। 1970 में नगर पंचायत कोटरा का दर्जा मिलने के नगर पंचायत में 19 वर्ष तक प्रशासक तैनात रहे। इसके बाद वर्ष 1989 में हुये नगर निकाय चुनाव में पहली बार मूलचंद्र बुधौलिया चेयरमैन निर्वाचित हुये। इसके बाद वर्ष 1995 में हुये निकाय चुनाव में कोटरा के मतदाताओं ने कृष्णकांत व्यास उर्फ पुत्तन पर विश्वास जताया और उन्हें चेयरमैन पद पर बैठाया। तो वर्ष 2000 में चेयरमैन पद पर पहली बार श्रीमती मिथलेश स्वामी पत्नी जवाहर स्वामी ने जीत का झंडा फहराया। तो वर्ष 2007 में हुये चुनाव में  अल्प संख्यक समुदाय के मु. आजाद कादरी ने पहली बार जीत दर्ज कर चेयरमैन पद हथिया लिया था। इस चुनाव में कस्बावासी ने अपनी आंखों से बहुत कुछ देखा भी था। जब मतदान के एक दिन पहले एक राजनैतिक दल के नामी गिरामी लोगों ने अपना डेरा जमाया ताकि मतदान को प्रभावित कर सके। लेकिन उसी दौरान उक्त मामले की जानकारी जिला प्रशासन को लगने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने उक्त स्थान पर छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया तो वहां शरण पाये राजनैतिक दल के नामी गिरामी लोग इधर उधर भागते नजर आये। इसके अगले दिन भी प्रशासन पूरी तरह से चैकन्ना रहा था जिससे मतदान शांति पूर्ण संपन्न कराया गया था। लेकिन जैसे ही नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियां शुरू हुयी तो कस्बावासियों के जेहन में वर्ष 2007 में हुये निकाय चुनाव के दृश्य आंखों के सामने आने लगे। हालांकि वह दृश्य अब स्मृतियांे में ही कैद हैं। इसके बाद वर्ष 2012 में नगर पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति पुरुष के लिये आरक्षित हुआ तो भाजपा के पातीराम ने अपनी जीत का परचम लहराया था।

 

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