देहरादून । टाउनहाल में अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने प्रसिद्ध मराठी लेखक जयवंत दलवी  लिखित और निशा वर्मा निर्देशित नाटक ‘पुरुष’ का शानदार मंचन किया।

 

नाट्य मंचन से पूर्व यशस्वी पत्रकार व कवि स्व. गिरजा शंकर त्रिवेदी को प्रसिद्ध कवि बुद्धिनाथ मिश्र, बीएसएनएल के महाप्रबंधक ओ पी कनौजिया व अन्य गणमान्य लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित अपने उद्गार व्यक्त किए।

नाटक पुरुष शुरू होता है अण्णा साहब आप्टे के घर से। जो एक आदर्श शिक्षक हैं। उनकी अपनी पत्नी तारा के साथ कुछ वैचारिक मतभेद होते हैं, लेकिन वह हमेशा उनका साथ देती है। अण्णा की बेटी अंबिका एक स्कूल में पढ़ाती है। उसका एक दोस्त है सिद्धार्थ, जो दलितों के हक की लड़ाई लड़ता है। नाटक के अगले सीन में बाहुबली गुलाबराय जाधव की एंट्री होती है, जिसके काले-कारनामों को कई बार अंबिका सबके सामने उजागर कर चुकी होती है। गुलाब राय अंबिका से बदला लेने के लिए उसको धोखे से डाक बंगले में बुलाकर बलात्कार कर देता है। यह सदमा अंबिका की मां तारा बर्दाश्त नहीं कर पाती और आत्महत्या कर लेती है। बिगड़ते हालात में अंबिका सिद्धार्थ का भी साथ छोड़ देती है। अब अंबिका को अपने संघर्ष की लड़ाई अकेले लड़नी है और वह गुलाबराव को जीवन भर याद रखने वाला सबक सिखाती है। नाटक के अंतिम दृश्य में अंबिका पुलिस को कॉल करती है। इंस्पेक्टर गॉडगिल पूछते हैं  ‘क्या तुमने गुलाब राव को मार डाला। अंबिका कहती है नहीं, मैंने उसका पुरुषत्व हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर डाला।’ इसी के साथ नाटक का पटाक्षेप होता है। नाटक में महेंद्र धुरिया, जोली घोष, नीलम प्रिया मिश्रा, दीपिका, सुरेश श्रीवास्तव, विजयभान सिंह, स्वयं कुमार, मनोहर सुखेजा, अनिल गौड़, अनिल निगम, सम्राट, संजय शर्मा, राघवेन्द्र प्रजापति, विजय भास्कर व धीरेंद्र ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई। प्रस्तुति नियंत्रक व सहायक निर्देशक डा. ओमेंद्र कुमार थे। संगीत सिरीष सिन्हा व सलाहकार निर्देशक कृष्णा सक्सेना थे।

कार्यक्रम में राजू रावत, आर सी भटनागर, सुनील भाटिया समेत बड़ी संख्या में कलाप्रेमी मौजूद रहे।

 

 

 

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