कोंच (उरई )। लगातार मीडिया मंे आ रही सिंथेटिक खोये के अवैध कारोबार के संबंधित खबरों को प्रशासन ने लिया संज्ञान मंे लेकर बीहड़ी क्षेत्र में स्थिति ग्राम ब्यौना राजा में पहुंची तो वहां भगदड़ मच गयी मौके पर पहुंची टीम को बड़ी-बड़ी कड़ाहियों के साथ ही डालडा व अन्य ऐसे खाद्य पदार्थ मिले हैं जिसके मिश्रण से सिंथेटिक खाये का निर्माण कर उसे जनपद में ही नहीं बल्कि दूर दराज के क्षेत्रों में सप्लाई किया जा रहा था। तो पुरानी मऊ में संचालित सिंथेटिक खोया अड्डे पर कार्रवाई के दौरान कोई नहीं मिला संभावना जतायी है कि खोया माफिया को प्रशासनिक कार्यवाही की भनक लगने के चलते ही वह सारा सामान छोड़कर भाग जाने में सफल रहा।
बीहड़ी क्षेत्र में सिंथेटिक खोया बनाने के अड्डे पर खाद्य सुरक्षाधिकारी एमएस निरंजन अपने सहयोगियों के साथ जा धमके बीहडाचंल के गांव पुरानी मऊ जिसका आधुनिक नाम भरतपुर है में और मौके पर देखी धधकने वाली भट्टियां पर यहां वो नहीं मिला जो सुनने मंे आ रहा था हां भट्टियां घास फूस का छप्पर जिसमंे बैठकर खोया बनाया जाता है बड़ी बड़ी कढ़ायों में जंगलों की कटी बड़ी संख्या मंे लकडियां तो नजर आयी पर इन सबका उपयोग कौन करता है ये बताने वाला कोई नहीं था। मौके पर मिले राजेश यादव राम गुड्डन यादव, सोवरन सिंह यादव, आशीष कुमार, बन्नाम सिंह आदि ने बताया कि काम पहले होता था। अब बन्द कर दिया गया कारोबारी का नाम रमाकांत पुत्र मुलायम सिंह निवासी गोहन बताया गया जो मौके पर नहीं मिला जब अधिकारी ने उन लोगों से कारोबारी का मोबाईल नम्बर मांगा तो कोई बताने को तैयार न था मौके पर खड़ी लोडर आग छोडती भट्टियां लकड़ी का विशाल भण्डार और बड़ी बड़ी कढाहियां छप्पर के अन्दर रखे दर्जनांे डालडा के टीन और अनेक सामग्री ये दर्शाती है कि काम अभी जारी है पर मौके पर क्यों काम बन्द मिला इसका कारण जानने का प्रयास किया जायेगा आगे देखा गया ग्राम ब्यौना राजा को तो यहां एक मन्दिर के पीछे वाले भाग में धधक रही थी भट्टियां जैसे ही अधिकारियों को पास आते देखा तो कुछ कर्मचारी तो भाग खड़े हुये कुछ भट्ठियां उतारने मंे लग गये जब उनसे पूंछा कि कारोबारी कौन है तो कर्मचारियो ने बताया कि वह तो वाहर है उनका नम्बर लगाकर बात कराओ तो कर्मचारी ने भी पूरी स्वामी भक्ति का काम किया कहता रहा साहब मोबाईल ही काम नही कर रहा स्विच आफ होता जा रहा है जब मांगा नम्बर तो इसमंे भी चतुराई दिखा दी फर्जी नम्बर दे दिया जो लग ही नही रहा था यहां न केवल खोया का निर्माण किया जा रहा है घी का भी कारोबार होता है इसमंे सरकार को न केवल खोया दूध के माध्यम से क्षति पहुंचायी जा रही है बिजली का उपयोग नम्बर दो मंे हो रहा है जंगलों से वनों को काटकर लकड़ी का अवैध काम हो रहा है यहां खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने नमूना भी भरे और मौके के फोटो ग्राफ्स भी लिये मौके पर मिले चन्र्दपाल रहमान अली कुछ भी बताने को तैयार नही थे लेकिन वहाँ पर आये अन्य ग्रामीणों ने जो कुछ बताया वह चांैकाने लायक है। उनका कहना था कि मैं बता तो रहा हूं मेरा नाम न आये क्यो कि कारोवारी दवंग किस्म का है उन्होंने बताया आप लोगांे ने केवल दूध का सैम्पुल लिया है अन्दर रखा खोया पर तो नजर ही नहीं गई घी पर नजर नहीं गयी जिस सामग्री से खोया का निर्माण किया जा रहा है। वह तो आप लोग देख ही नहीं पाये आप लोगांे को वास्तविकता जाननी है तो तरीका बदल कर आओ सब कुछ सामने आ जायेगा मां भवानी के मन्दिर में चल रहा है ये सब कुछ और ग्रामीण बने अंजान यहां तक कि थाना कैलिया की पुलिस को भी ये सब पता नहीं है।
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क्या कहते है मन्दिर के महंत जमुनादास
साहब हम करें तो क्या यहां केवल यही नहीं होता और भी कई काम ऐसे होते है जिनको नहीं होना चाहिये हमने कई बार रोका पर ये मानते नही किसी भी स्थिति पर उतारू हो जाते है जिस जगह पर यह कारोबार और आप जो कह रहे हैं कि वह सब भी होता है जो नहीं होना चाहिये। जमुनादास का कहना था यदि वह जमीन खाली करने को कहते हैं दबंग लोग उल्टे मारने पीटने पर उतारू हो जाते है क्या इस स्थिति से स्थानीय पुलिस को अवगत कराया नही कराया क्योंकि मुझे यहां रहना है कौन वो जो ये सब कर रहा है कारोबारी तो बाबा कहते है कि कारोबारी तो ठीक है पर उसके कर्मचारी ये सब करते है। कारोबारी से क्यांे नही कहा तो बस कहते है कि दीपावली के बाद ये सब झंझट दूर ही किये देते है। कारोबारी का नाम सुमित बताया गया है जो मऊ के निवासी है बाबा जमुनादास कहते है कि छह महीने से किराया भी नहीं मिला वो सब क्या होता है जो नही होना चाहिये जमुनादास पहिले तो भय बस कुछ बोलने को तैयार नही हुये जब उनसे कहा भयभीत न हो हकीकत बताओ प्रशासन तुम्हारे साथ है। तो उन्होंने कहा यहां अण्डे बनाये जाते है सुरापान किया जाता है। और वह सब कुछ …. पर करे क्या करें ग्राम ब्यौनाराजा के मां भवानी के मन्दिर में ये सब हो रहा है और स्थानीय पुलिस को जानकारी भी नहीं दी गई ये स्वयं बाबा जी के लिये सोचनीय विषय है।

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