कालपी-उरई । कालपी नगर निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों द्वारा राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों को शिकस्त देने का अभियान शुरू कर देने से भाजपा, सपा, बसपा, व कांग्रेस के रणनीतिकारों में बेचैनी बढ़ने का तथा राजनैतिक वर्चस्व का संकट बढ़ता जा रहा है।
कालपी नगर पालिका चुनाव में इस समय निर्दलीय प्रत्याशी बडे़ पैमाने पर तामझाम के साथ चुनाव प्रचार में सैकड़ों की संख्या में समर्थकों को साथ में लेकर प्रचार अभियान शुरू कर देने से राष्ट्रीय दलों में भी अधिक कार्यकर्ता एकजुट करने की कोशिशें शुरू हो गयी है लेकिन अभी तक कोई खास सफलता नही मिल पाने से परेशान नजर आ रहे है। निर्दलीय प्रत्याशी सीमा जाटव के समर्थन में उतरे पूर्व विधायक छोटे सिंह एवं कांग्रेस पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज चतुर्वेदी सहित नगर के दर्जनों काग्रेस से बगावत कर समर्थन में उतर आए नेतागणों ने अपनी राजनैतिक हैसियत लगाकर राष्ट्रीय दलों से आगे निकलने की होड़ लगा रखी है। उधर दूसरी ओर आप पार्टी के उम्मीदवार हरचरन ताहरपुरी ने बसपा से बगावत कर अपनी पत्नी कमला ताहरपुरी को मैदान में उतारा है। ताहरपुरी के लगभग दस वर्षो से नगर एवं क्षेत्र की जनता को इत्र लगाकर स्वागत करने के कारण उनका परिचय जनता से ज्यादा है उसी का लाभ मिलने से कमला ताहरपुरी के समर्थकों में काफी उत्साह है। ताहरपुरी का कहना है कि मै जहां भी वोट मांगने जाता हूं वहां मुझे भरपूर समर्थन मिल रहा है। इसी तहर ग्यादीन अहिरवार की पत्नी रामेश्वरी देवी, मधूलिका देवी सहित कई निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में होने के कारण भाजपा, बसपा, सपा व कांग्रेस की चिंता बढ़ रही है। सबसे ज्यादा खतरा निषाद पार्टी की उम्मीदवार श्रीमती मंजू गौतम पत्नी महेन्द्र गौतम के तूफानी चुनाव प्रचार तथा निषाद एवं बाल्मीकि समाज से लगभग चार हजार मतदाताओं का एक स्वर में मंजू गौतम को समर्थन देने से निषाद पार्टी उम्मीदवार की तरफ उच्च जातियों में खासतौर से ब्राहम्ण एवं वैश्य समाज का रूझान बढ़ जाने से निषाद पार्टी खेमा में जोरदार उत्साह है। चुनाव प्रचार के दूसरे दिन हरीगंज, जुलैटही, तरीबुल्दा, बड़ाबाजार, निकासा, अदलसराय मोहल्ले में जनसंपर्क अभियान के तहत मिल रहा व्यापक जनसमर्थन निषाद पार्टी में काफी उत्साह बढ़ाता जा रहा है। चुनावी जानकारों के अनुसार निर्दलीय प्रत्याशी अगर इसी तरह जोरदार ढंग से चुनाव प्रचार व जनसंपर्क में जुटे रहे तो कालपी नगर पालिका में निर्दलीय प्रत्याशी अध्यक्ष पद पर बैठने के काफी आसार लगने लगे है। इससे सबसे ज्यादा बैचैनी भाजपा एवं सपा, खेमों में है क्योंकि इन दलों में दलीय गुटबंदी तथा वर्चस्व की आग बुझाने की जगह और धधक रही है। अगर यह आग डैमेज कंट्रोल के तहत शांत नही होती है तो चुनावी परिणाम आश्चर्यजनक हो सकते है। कालपी नगर का 42 हजार मतदाता अभी आंकलन करने लगा है मतदाता सुरक्षित सीट होने के कारण दलीय स्तर से हटकर यह सोच रहा है कि कोई ईमानदार प्रत्याशी विजयी हो तभी नगर पालिका के विकास के कार्य अच्छे हो सकते है। दलीय चश्मा वालों के अवाला समर्थक मतदाताओं जो सर्वाधिक होते है वह यह सोच रहे है कि नगर चुनाव में इस बार बड़े-बड़े नेताओं के झूठे वायदों तथा आश्वासनों पर ध्यान न दिया जाए। देखना शेष होगा कि वास्तविक रूझान तो 22 को ही पता चलेगा।






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