कोंच-उरई । ‘बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी बाली रानी थीÓ देशभक्ति और वीरता की ऐसी बेमिसाल मिसाल प्रथम स्वातंत्र्य समर की अगुवाकार रानी झांसी लक्ष्मीबाई की 182वीं जयंती यहां भारत विकास परिषद् की स्थानीय शाखा ने मनाते हुये कहा कि लक्ष्मीबाई बुंदेलखंड की आन बान और शान की प्रतीक हैं जिन्होंने देश के लिये अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया लेकिन अंग्रेजों की गुलामी नहीं स्वीकार की। ऐतिहासिक स्मारक चंदकुंआ स्थित रानी झांसी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शाखा सदस्यों ने उनके कार्यों को याद करते हुये कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई के शौर्य की गाथायें बुंदेलखंड के बच्चे बच्चे में नव स्फूर्ति का संचार करती हैं।

महारानी लक्ष्मीबाई की 182वीं जयंती पर यहां चंदकुंआ स्थित रानी की प्रतिमा के नीचे जुटे भारत विकास परिषद् के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने उनको याद करते हुये कहा कि उनका जन्म दिन मनाते हुये वे खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बुंदेली धरा पर राष्ट्रभक्ति का इतिहास रचा। उन्होंने रानी झांसी लक्ष्मीबाई को प्रथम स्वाधीनता संग्राम का प्रणेता बताते हुये कहा कि उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान तक कर दिया लेकिन अंग्रेजी दासत्व को स्वीकार नहीं किया। ऐसी महान विभूति के चरणों में नतमस्तक होते हुये उनकी वीरता को याद करके हम उनके कार्यों से प्रेरणा लें और आपसी सद्भाव कायम करते हुये राष्ट्र निर्माण में अपना हाथ बंटायें। परिषद् के शाखा अध्यक्ष देवेन्द्रकुमार द्विवेदी की अगुवाई और शाखा सचिव सीताराम प्रजापति के संचालन में आहूत कार्यक्रम मेंवीरांगना की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया और उन्हें श्रद्घांजलि दी गई। इस दौरान प्रमोद गुप्ता, श्रीकांत गुप्ता, राजेशचंद्र गोस्वामी, नृसिंह बुंदेला, विजय रावत, वीरेन्द्र बेहरे, संजय सिंघाल आदि लोग मौजूद रहे।

 

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