उरई। लाखों रुपये की लागत से ग्राम पंचायतों में बनवाये गये सचिवालय प्रशासन और प्रधान की लापरवाही की वजह से लावारिस होकर खंडहर में तब्दील नजर आ रहे हैं।
महेबा ब्लाक के ग्राम किर्राही में वित्तीय वर्ष 2009-10 में सुव्यवस्थित पंचायत सचिवालय का निर्माण करवाया गया था। जिसमें प्रधान व सचिव के बैठने के कक्ष और मीटिंग हाॅल के अलावा मनरेगा व अन्य योजनाओं की सामग्री रखने की व्यवस्था थी।
इस सचिवालय के निर्माण पर 14 लाख रुपये से अधिक बजट का व्यय हुआ था। लेकिन सचिवालय का कोई उपयोग नही किया गया। पंचायत की बैठकें प्रधान अपने घर पर करते हैं जो कि अवैध है। सचिव कई ग्राम पंचायतों के दायित्व का बहाना लेकर सचिवालय में बैठना नही चाहते। ऐसे में सचिवालय शुभारंभ के पहले ही जीर्णशीर्ण होने लगा है।
सचिवालय की हालत देखे तो कांजी हाउस नजर आता है जिसमें दर्जनों आवारा गाय बैठी रहती हैं। उनके गोबर और पेशाब से सचिवालय में बदबू दौड़ती रहती है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत सभी गांवों में प्रमुख स्थानों की साफ-सफाई की गई थी। लेकिन इसमें कागजी काम भर ही हुआ है जिसकी पोल किर्राही का सचिवालय खोल रहा है। जहां कि गंदगी का अंबार नजर आता है। ग्रामीणों में इतनी लागत के बावजूद हो रही सचिवालय की उपेक्षा पर रोष छाया हुआ है। उच्चाधिकारियों का ध्यान सचिवालय की बदहाली दूर करने के लिए आकर्षित कराया जा रहा है।







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