उरई। बारिश में कमी और बढ़ते भू जल दोहन के कारण जिस संकट की भविष्यवाणी कुछ वर्षों से की जा रही थी वह प्रत्यक्ष दिखाई देने लगा है। हैंडपंप तक जबाव दे चुके हैं जिससे पेयजल की समस्या गहरा गई है। उधर सिचाई के मामले में किसानों ने जैसे-तैसे पलेवा तो कर लिया है लेकिन आगे अंकुरण के बाद फसल बढ़ने के लिए जब सिचाई की जरूरत पड़ेगी तो पानी कहां से आयेगा यह चिंता किसानों को खाय जा रही है।

इस वर्ष बारिश के मौसम में नाम मात्र की वर्षा हुई जिसके बावजूद लोगों ने पानी की फिजूलखर्ची पर रोक नही लगाई। कुछ ही वर्षों में टयूबवैल और घरों में समरसिवल की संख्या बेतहाशा बढ़ी है जो बड़े पैमाने पर भू जल को उलीचने का सबब बन गये हैं। नतीजा यह है कि जल स्तर इतना नीचे चला गया है कि घंटों मोटर चलाने के बाद नलों में पानी आता है। हैंडपंपों की भी यही स्थिति है। बूंद-बूंद पानी गिरने से एक बाल्टी भरने में ही पूरा समय लग जाता है। जिससे हैंडपंप पर लोगों की कतारें लगी रहती हैं। नतीजतन मारा-मारी में झगड़े भी बढ़ रहे हैं।

सिचाई में भी इस वर्ष काफी समस्या रही। जल स्तर नीचा गिरने से निजी नलकूंप सफेद हाथी बनकर रह गये। लोगों को पलेवा के लिए नहर का इंतजार करना पड़ा। पलेवा तो जैसे-तैसे हो गया है लेकिन सिचाई के समय पर्याप्त पानी न मिला तो किसानों को मेहनत के साथ-साथ लागत से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

 

 

Leave a comment