उरई। जिलाधिकारी मन्नान अख्तर ने बैंकों को हिदायत दी है कि वे विभागों द्वारा भेजी जाने वाली पत्रावलियों पर प्राथमिकता के आधार पर ऋण वितरित करें। अगर पत्रावली में छोटी-मोटी कमी हो तो उसमें विभाग से संपर्क स्थापित कर सुधार करवायें तांकि रुकावट दूर हो सके। बड़ी कमी होने पर पत्रावलियों को लंबित रखने की बजाय निरस्त कर दें। लेकिन उन्होंने आगाह किया कि निरस्त करने की नौबत तभी लानी चाहिए जब वास्तविक तौर पर पत्रावली में कोई गंभीर कमी हो।

बैंकों की त्रैमासिक समीक्षा बैठक गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिलाधिकारी मन्नान अख्तर की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इसमें जिलाधिकारी ने कड़क तेवर दिखाये। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार और नई औद्योगिक और व्यवसायिक इकाइयां स्थापित करने के लिए चलाई जा रहीं विभिन्न सरकारी योजनाएं विभाग और बैंकर्स के बीच तालमेल के अभाव की वजह से गतिरोध का शिकार रहती हैं। इसे सहन नही किया जायेगा। उन्होंने नगद जमा अनुपात में कमी के लिए पीएनबी, बैंक आॅफ बड़ौदा, आईडीबीआई, सिन्डीकेट बैंक, आईसीआई के मैनेजरों से कहा कि वे व्यक्तिगत रुचि लेकर इसमें सुधार करायें। अगली समीक्षा तक तस्वीर बदलती दिखनी चाहिए। वरना खैर नही होगी।

उन्होंने कहा कि जिन 44 हजार किसानों के कर्जे माफ किये गये हैं उन्हें नये क्रेडिट कार्ड जारी कर फसली ऋण उपलब्ध कराने में तत्परता बरती जाये। तांकि उनकी फसलें बीमित हो सकें। 102 ऐसे चिन्हित ग्रामों में जो पोर्टल पर प्रदर्शित नही हो रहे उनमें फसल बीमा के लिए शिविर आयोजित कराये जायें तांकि कोई किसान बीमित होने से छूट न सके और दैवीय आपदा की स्थिति में उन्हें पूरी मदद दिलाई जा सके।

डीएम ने याद दिलाया कि प्रत्येक न्याय पंचायत के दो ग्रामों में ग्राम पाठशालाएं आयोजित की जायेगी जिनमें ग्रामीणों को अपनी आमदनी दोगुनी करने के गुर बताये जायेगें। इसके लिए अधिकारी और बैंकर्स व्यक्तिगत तौर पर रुचि लें।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह, अपर जिलाधिकारी राजस्व आरके सिंह, अपर जिलाधिकारी न्यायिक गुलाब चंद्र, सिटी मजिस्ट्रेट एनपी पाण्डेय, लीड बैंक के मुख्य प्रबंधक पुलक कुमार राय, रिजर्व बैंक के एलडीओ आचार्य सागर विकास, उपनिदेशक कृषि अनिल पाठक और जिला कृषि अधिकारी राममिलन सिंह परिहार सहित विभिन्न बैंकों के मैनेजर व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave a comment