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0 ज्यादातर निर्दलीय प्रत्याशी मतदान के बाद ही मान चुके अपनी हार

उरई। 22 नवंबर को उरई नगर पालिकाध्यक्ष पद के लिये हुये मतदान में 1 लाख 42 हजार मतदाताओं में से महज 80 हजार के लगभग मतदाताओं के द्वारा मतदान किये जाने के बाद से किसी भी प्रत्याशी की जीत का दावा एक भी प्रत्याशी का समर्थक करने में हिचक महसूस कर रहा है। लेकिन समर्थकों का मनोबल मतगणना के दिन तक बनाये रखने के लिये कुछ समर्थक अपने ही प्रत्याशी की जीत को पक्का बताकर उन्हें गुमराह करने से नहीं चूक रहे हैं। जबकि मतदान के बाद उन्हें अपने प्रत्याशी की हैसियत का अंदाजा हो चुका है। इसके बाद भी वह सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। खास बात तो यह है कि राजनैतिक विश्लेषक तक टाॅप थ्री में कौन-कौन प्रत्याशी शामिल रहेंगे इसका भी दावा नहीं कर पा रहे हैं। तो वहीं ज्यादातर निर्दलीय प्रत्याशी मतदान के दौरान मिले रुझानों के बाद अपनी हार को स्वीकार कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में उरई नगर पालिका परिषद का कौन चेयरमैन निर्वाचित होगा यह मतगणना के दौरान ही पता चल सकेगा।

22 नवंबर को मतदान होने के बाद से ही नगर में तरह-तरह की चर्चाआंे का दौर शुरू हो गया था। लेकिन इन चर्चाओं में कोई भी व्यक्ति किसी एक प्रत्याशी की जीत का पक्का दावा नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे ठोस कारण यह है कि किसी भी जाति ने किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में मतदान न करना माना जा रहा है। इस मामले में लकी रहे निर्दलीय प्रत्याशी अनिल बहुगुणा के पक्ष में अवश्य वैश्य समाज लामबंद दिखायी दिया लेकिन वह वोट के रूप में कितना तब्दील हुआ यह भी अपने आपमें बड़ा रहस्य समेटे हुये हैं। जिस तरह से मतदान के बाद से नगर में चुनावी आंकड़ेबाजी चल रहा है उसमें भी टाॅप थ्री की लिस्ट में वह कौन तीन प्रत्याशी शामिल रहेंगे उनके नामों को भी सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। इसी बीच चर्चायें शुरू हो जाती है टाॅप फोर की लिस्ट जरूर बनाये जाने का प्रयास किया जाता है। लेकिन उसमें भी आंकड़ेबाज किसी प्रत्याशी को प्रथम स्थान पर तो दूसरा आंकड़ेबाज चैथे नंबर के प्रत्याशी को प्रथम स्थान पर रखकर अपने जीत के आंकड़े सामने रखने से नहीं चूकता है। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि 1 दिसंबर जब मतगणना शुरू होगी उसी के बाद मतपेटियों में कैद प्रत्याशियों के भाग्य का उदय होगा। लेकिन तब तक प्रत्याशियों के समर्थक आंकड़ेबाजी का नया शिगूफा छोड़कर अपना समय पास करने का माध्यम बना रहे हैं। ताकि एक दिसंबर तक जिन लोगों को परिणाम जानने की उत्सुकता है वह उनके ही आंकड़ों में उलझा रहे और मतदान के बाद परिस्थितियों पर ध्यान ही न सके। जबकि इससे इतर मतदान के बाद से जिस तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था उसके अनुसार कोई भी राजनैतिज्ञ टाॅप थ्री की लिस्ट तीन प्रत्याशियों के नामों का उल्लेख नहीं कर पा रहा है तो वह टाॅप फोर की लिस्ट सामने रखकर लोगों को गुमराह करने से नहीं चूकता है। वैसे भी नगरवासियों को यह भलीभांति जानकारी है कि टाॅप फोर में कौन-कौन प्रत्याशी शामिल है जो चुनावी मुकाबले में मतदान के दौरान चर्चाओं का केंद्र बिंदु बने रहे।

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