कोंच-उरई । जिस प्रकार किसी भी समाज में परिवर्तन और क्रान्ति एक दिन में नहीं होती, उसी प्रकार सफलता और असफलता भी एक दिन की प्रयोगशाला नहीं है। वर्षों-वर्षों की कठोर तपस्या और संघर्ष के बाद ठाकुरदास वैद और सुशीला देवी वैद जैसे महान व्यक्तित्व तैयार होते हैं। जो शहीद-ए-आजम भगतसिंह की परंपरा है, उसी परंपरा को ठाकुरदास वैद ने आजीवन निभाया, जिसका विवरण उनकी आत्मकथा में स्पष्ट परिलक्षित होता है। उपरोक्त विचार स्व. श्रीमती सुशीलादेवी टी.डी.वैद स्मृति न्यास कोंच द्वारा भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) व प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) कोंच इकाईयों के सहयोग से कीर्तिशेष वामपंथी विचारक व एमपीडीसी कोंच के संस्थापक प्राचार्य स्व. ठाकुरदास वैद के 95वें जन्मदिवस पर आयोजित साहित्य समारोह में आयोजित ‘सांझा संस्कृति और आज का समाजÓ विषयक संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय इप्टा के राष्टï्रीय महासचिव राकेश ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की विशेषता ही है। अनेकता में एकता ही भारतीय संविधान का मूलाधार भी है। जो लोग एक रंग, एक भाषा, एक धर्म की बात करते हैं, वे लोग ही राष्ट्रीयता के शत्रु हैं। भारतीय संस्कृति में विविधता का भाव है, जो उसकी एकता को और अधिक मजबूत करता है।

बीती रात बल्दाऊ धर्मशाला में आयोजित उक्त संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केन्द्र इलाहाबाद के निदेशक और प्रगतिशील लेखक संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने कहा कि ठाकुरदास वैद आजीवन बुराई के खिलाफ निडर होकर खडे रहे। सांसारिक छल प्रपंचों और झंझावतों की परवाह न करते हुए उन्होंने हमेशा सत्य का साथ दिया। उन्होंने कहा कि आज हम ऐसे दौर में जीने को बाध्य हैं, जहां स्मृतियों को पौंछा जा रहा है, सामाजिक और मानवीय मूल्यों पर प्रहार किया जा रहा हैं, तर्क, चेतना और विवेक पर हमले किए जा रहे हैं, सांझी विरासत और संस्कृति को छिन्न भिन्न करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में ठाकुरदास वैद और उनकी सहधर्मिणी सुशीलादेवी वैद का आंदोलनकारी व्यक्तित्व और ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि उनके व्यक्तित्व और कृतित्व में प्रगतिशील मूल्यों की स्पष्ट छाप दिखाई देती है, जो बांटने की संस्कृति के विरुद्ध खड़े रहने में लोगों की मदद करती है।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जिला सेवायोजन अधिकारी, जालौन अनिलकुमार सिंह ने वर्तमान परिस्थितियों में सांझा संस्कृति की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए समाज के बेहतर निर्माण हेतु ठाकुरदास वैद के पदचिन्हों का अनुसरण करने का आह्वïान किया। वहीं वैद की स्मृतियों पर प्रकाश डालते हुए उरई इप्टा के अध्यक्ष का. देवेन्द्र शुक्ला ने उन्हें महामानव की संज्ञा देते हुए उनके वाम आंदोलन मेंकिए योगदान को रेखांकित किया। उरई इप्टा के महासचिव राज पप्पन ने वैद के सांस्कृतिक अवदान पर चर्चा करते हुए कहा कि इप्टा कोंच द्वारा आयोजित सांस्कृतिक यात्राओं में उनका जोश युवाओं को मात देने वाला था। इप्टा के प्रांतीय उपाध्यक्ष ओपी अवस्थी ने कहा कि वे वैचारिक क्रान्ति, सांझी विरासत के अग्रदूत और वाम आंदोलन के आधार स्तंभ थे। उन्होंने अपने लेखों एवं क्रियाकलापों के माध्यम से सामाजिक बदलाव में अपना योगदान दिया। इसके पूर्व अतिथियों द्वारा स्व. ठाकुरदास वैद लिखित व डॉ. मोहम्मद नईम, अनिल वैद द्वारा संपादित पुस्तकों ‘वे दिन-वे लोगÓ तथा ‘आधुनिक हिन्दी साहित्य: वाद और प्रवृत्तियांÓ का विमोचन किया गया व वक्ताओं द्वारा अपने उद्बोधन में पुस्तकों के महत्व को रेखांकित किया गया। इस अवसर पर ठाकुरदास वैद की स्मृति पर आधारित व्याख्यान भी दिए गए। कार्यक्रम का संचालन इप्टा कोंच के संरक्षक डॉ. मोहम्मद नईम द्वारा किया गया। इस अवसर पर शाह आसिफ अली, डॉ. हरिमोहन गुप्त, चौधरी धीरेन्द्र यादव, डॉ. बाबूराम शर्मा, श्रीनिवास गुप्ता, बाबू संतलाल अग्रवाल, संतोष गोयल, सरनाम सिंह यादव, मुनब्बर शाह, मुन्ना वैद, अवधेश द्विवेदी एडवोकेट, अहमदखां कडू मामा, सुनील लोहिया, अंजनी श्रीवास्तव, राधेकृष्ण श्रीवास्तव, सुरेश खरे, राजेश द्विवेदी, नरेन्द्र मोहन मित्र, रम्मू अग्रवाल, संतोष सोनी, राजीव दीक्षित जरा वाले, राजेन्द्र दुवे, सुनीलकांत तिवारी, राजा तिवारी, अरुण मिश्रा, मुईनउद्दीन अजमेरी, मो. तारिक सहित सैकडों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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