
कोंच –उरई । देश के मशहूर जनकवि बल्ली सिंह चीमा ने अपनी गजलों, मुक्तकों के माध्यम से श्रोताओं को बार-बार ताली बजाने पर मजबूर कर दिया, ‘तुम मिले हो तो ये दर-दर पे भटकना छूटा, एक बेकार को कुछ काम मिला हो जैसे, तेरे होंठों पे मेरा नाम, खुदा खैर करे, एक मस्जिद पे श्रीराम लिखा हो जैसेÓ। ‘तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो, आदमी के पक्ष में हो या कि आदमखोर होÓ। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ गीतकार रामेन्द्र त्रिपाठी (आगरा) ने अपने गीतों, मुक्तकों एवं गजलों की बौछारों से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया, ‘दुनिया के सारे दुखों को जेबों में डालकर, सिक्कों की तरह गम को उछालते हैं हम, तूफान के रुकने की दुआ हम नहीं करते, तूफान से लडऩे का हुनर जानते हैं हमÓ।
साहित्य समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा कीर्तिशेष ठाकुरदास वैद और श्रीमती सुशीलदेवी वैद के चित्र पर माल्यार्पण कर व द्वीप प्रज्जवलन कर एवं इप्टा रंगकर्मियों मिर्जा शफकत बेग, सायना खान, तैयबा, रानी कुशवाहा, कोमल अहिरवार, आदर्श, ट्ंिकल राठौर, अमन सोनी, कन्हैया लाक्षकार, राज शर्मा द्वारा प्रस्तुत इप्टा गीत ‘बजा नगाड़ा शांति का, शांति का, शांति काÓ तथा स्वागत गीत से किया गया। अतिथियों एवं साहित्यकारों का माल्यार्पण व बैच अलंकरण न्यास के मुख्य न्यासी व कार्यक्रम आयोजक अनिल वैद, ज्योति वैद, आदित्य वैद व सहयोगियों धर्मेन्द्र गोस्वामी, मुईद अहमद, प्रमोद शुक्ला, राशिद अली, भास्कर गुप्ता, पारसमणि अग्रवाल, राहुल तलवाड़, अंचल गोस्वामी, अनिल पटैरया, जीतू गुप्ता, वासु वैद, रामकिशोर पुरोहित ललिया, मनोज दूरवार आदि द्वारा किया गया। आदित्य वैद द्वारा आभार व्यक्त किया गया। डॉ. सरिता वर्मा अग्रवाल व श्रीमती ज्योति वैद द्वारा रंगकर्मियों को मैडल पहनाकर सम्मानित किया गया। अतिथियों व कवियों को स्मृतिचिन्ह भी भेंट किये गये।







Leave a comment