
कोंच-उरई । 95वें श्री टीडी वैद जन्म स्मृति साहित्य समारोह के दूसरेे सत्र में कवि अर्जुन सिंह चांद के संचालन व वरिष्ठ गीतकार रामेन्द्र त्रिपाठी (आगरा) की अध्यक्षता में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसका आगाज करते हुए देश के जाने माने गीतकार यश मालवीय (इलाहाबाद) ने पिता को समर्पित अपनी रचना ‘पिता बसा हुआ है, घर की देहरी और दीवार मेंÓ से किया। वहीं डॉ. हिना आसिफ ने वैदिक ऋचाओं के जाप के माध्यम से विश्व शांति एवं मानव एकता का संदेश दिया। व्यंग्यकार केके अग्निहोत्री (कानपुर), विनोद साहू झांसवी तथा सत्यप्रकाश ताम्रकार ‘सत्यÓ (झांसी) ने अपनी राजनैतिक टिप्पणियों व सामाजिक विद्रूपताओं पर आधारित व्यंग्यों से श्रोताओं को गुदगुदाने व ठहाके लगाने को बाध्य कर दिया।
वरिष्ठ गीतकार यश मालवीय (इलाहाबाद) ने अपनी रचना कुछ इस अंदाज में पढी, ‘दबे पैरों से उजाला आ रहा है, फिर कथाओं को खंगाला जा रहा है, जो नशे में धुत्त हैं उनकी कहें क्या, होश वालों को संभाला जा रहा हैÓ
जनवादी शायर ओमप्रकाश नदीम (लखनऊ) के शब्दों में, ‘कभी उलटा बहाव है, कभी सीधा बहाव है, ऐसी उथलपुथल से, मुसीबत में नाव है। गंगा लहू, लहू है, तो जाहिर सी बात है, दिल में कहीं जरूर हिमालय के घाव हैÓ वरिष्ठ गीतकार व कवि अर्जुन सिंह चांद ने अपनी रचना पढते हुए कहा, ‘झूठों का सम्मान बढाया जाता है, सच्चाई का मान घटाया जाता है, लूटे हैं खलियान जिन्होनेंं गांवों में, ऐसों को प्रधान बनाया जाता हैÓ मशहूर कवियत्री शबाना सबा (चरखारी) ने अपनी दिलकश शायरी व तरन्नुम भरे अंदाज में महफिल में शमां बांध दिया, ‘आह भरती हूं तो छाले मेरे दिल के फूटे, सांस लेती हूं तो जख्मों को हवा लगती हैÓ







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