
उरई। बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच और उसके साथी संगठनों द्वारा रविवार को दलित के मुद्दे पर सम्मान मार्च निकाला गया । बाद में प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में पहुँच कर न्याय सभा की।
डा. अम्बेडकर चौराहा से दलित अधिकार व सम्मान मार्च की टीम पैदल मार्च करती कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची जहां पर सभा हुई जिसमे पीड़ितों ने अपनी-अपनी समस्याओं को रखा । एक महिला ने कहां कि उसकी भतीजी के साथ गावं के दबंगों ने बलात्कार किया जिसकी बड़ी मुश्किल से रिपोर्ट तो लिख गई लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं हो रही । आरोपी खुलेआम घूम रहे है। जमरेही से आए एक पीड़ित ने कहा कि उसकी बच्ची के साथ गावं के दबंगों ने गलत काम किया व उसकी हत्या कर दी । हम दर दर भटक रहे है लेकिन न्याय नहीं मिल रहा है। उमाशंकर ने कहा कि जाति के आधार पर की जाने वाली ज्यादती की घटनाओं की रिपोर्ट तक पुलिस दर्ज नहीं करती । अलग अलग गावं से आये पंचम सिंह, सुरेन्द्र उरकरा, राजेश मंगरोल, सुरजीत चरसोनी, प्रीती काशीरामपुर, कल्पना आटा, प्रीति बीजापुर, अजीत दमरास, रामसिंह चुर्खी ने कहा कि गावं में आज भी दलितों के साथ मानवीय गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं होता। जहाँ तक कानूनों की बात है अधिकारियों की नीयत साफ़ न होने से उनके जरिये पीड़ितों की कोई मदद नहीं हो पा रही है ।
महिला लीडर रिहाना मंसूरी , नीलिमा ,राजेश्वरी गौतम ने कहा कि गावं में सबसे ज्यादा उत्पीडन का शिकार दलित महिलाओं को होना पड़ता है, अब हम सभी महिलाओं को मिलकर अपने स्वाभिमान की लड़ाई लड़नी होगी तभी हमें न्याय मिलेगा। साथी संगठनों के लीडर विमलकुमार बौद्ध,राजेश्वरी, धर्मपाल राजपूत, नीलिमा-बुंदेलखंड एक्शन ग्रुप, रामकुमार,किसुनकुमार प्रजापति, रीता, रिहाना पहल ग्रुप, अनीता राज, संजय बाल्मीकि, राजकुमार जाटव ने अपने अनुभवों को रखते हुए कहा 70 साल की आजादी के बाद भी इसी जिले के गावों में बाल्मीकि महिलाओं को सिर पर मैला ढ़ोना पड़ रहा है ! पिछले 23 अक्टूबर की वाल्मीकि महिलाओं ने डलिया व झाड़ू के साथ मैला ढ़ोने की प्रथा को बंद करने व पुनर्वास की माँग को ले कर मार्च किया था लेकिन जिला प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जबकि एक माह का समय दिया गया था, अब हम लोग आज एलान करते है कि आगामी 10 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर विधान भवन के सामने मार्च कर सीधे मुख्यमत्री से गुहार लगायेंगे और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि यह प्रथा बंद नहीं हो जाती व हमारा स्थाई पुनर्वास नहीं हो जाता। मुकेश भीमा फाउंडेशन झांसी, नंदकुमार बहुजन फाउंडेशन, मनोज कुमार-समता मूलक मंच ने कहा आज जिस प्रकार से संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है उसको बर्दास्त नहीं किया जा सकता । आज हम सबको मिलकर संविधान की रक्षा व अपने हक एवं न्याय के लिए एक साथ एक मंच पर आकर संघर्ष करना होगा।
बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि दलितों के हक अधिकार व स्वाभिमान का यह कारवां अब रुकने बाला नहीं है। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।





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