सिरसाकलार-उरई। नलों के जरिये घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए लगभग दो दशक पहले सिरसाकलार में बनाई गई पेयजल टंकी बेहतर रख-रखाव के अभाव में जर्जर हो चुकी है। साथ ही लाइनों में लीकेज की वजह से दूषित पेयजल पहुंचाने के कारण यह परियोजना संक्रामक बीमारियों के प्रसार का सबब बन गई है।

1989 में स्थापित सिरसाकलार की पाइप्ड पेयजल परियोजना के जरिये सिरसाकलार, गिगौरा, जखा, जहटौली, तरसौल आदि आधा दर्जन गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति होती थी। लेकिन पुरानी पड़ने के साथ यह पेयजल परियोजना बूढ़ी हो जाने से अपनी क्षमता खो चुकी है। टंकी में और लाइन में जगह-जगह लीकेज हैं जिससे दूसरे गांवों में बहुत कम पानी पहुंच पाता है। जहां पानी पहुंचता भी है वहां लीकेज की वजह से शामिल होने वाली गंदगी के कारण यह पानी बीमारियों की सौगात परोसने का कारण बन जाता है।

इलाके के वाशिंदों विकास चैरसिया, रामजी सिंह, ओंमकार सिंह, श्यामजी, अंकित सिंह, राहुल कुमार आदि ने बताया कि साल भर पहले जब मंडलायुक्त जहटौली आये थे तो सभी संबंधित गांवों के लोगों ने सामूहिक रूप से लीकेज की विकट समस्या को लेकर उन्हें प्रार्थनापत्र दिया था और 3 किलोमीटर की पाइप लाइन को नये सिरे से बिछवाने की गुहार लगाई थी। लेकिन मंडलायुक्त के सकारात्मक आश्वासन के बावजूद आज तक इस पर कोई कार्रवाई नही हुई है।

क्या बोले जिम्मेदार

जल निगम के अवर अभियंता शिवकुमार ने इस बारे में बताया कि लीकेज मरम्मत और पाइप लाइन बदलने के लिए कार्य योजना का प्रस्ताव ऊपर भेजा जा चुका है जो कि लंबित है। बजट मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जायेगा।

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