कालपी (उरई )। नगर कालपी में कुछ खाद विके्रताओं द्वारा योजनाबद्ध तरीके से यूरिया खाद का बड़े पैमाने पर भंडारण कर लेने से यूरिया खाद प्रति बोरी ब्रिकी रेट 370 रुपये से 380 तक पहुंच गया है। खाद की महंगे दामों पर हो रही धड़ल्ले से बिक्री के कारण जहां खाद विक्रेता मालामाल हो रहे है वहीं किसान अधिकारिक लापरवाही के चलते अनावश्यक लुटने को विवश है।
विदित हो कि नगर कालपी में खाद बिक्री की करीब आधा दर्जन दुकाने संचालित है जिसमें आईएफडीसी इफको जो बिक्री में अग्रणी है के अलावा अन्य प्राइवेट खादों की बिक्री की जाती है। इस समय किसानों की गेहूं फसल में पानी का अधिकांश समय आ गया है जिसकों भांपकर नगर के कुछ बड़े खाद विक्रेताओं ने हजारों बोरियों की संख्या में इफको यूरिया खाद व अन्य यूरिया खाद बोरियों का एक योजनाबंद तरीके से भंडारण कर लिया गया है जिसकी खाद विके्रेेताओं में तेजी से चर्चा है जिसमें कहा जा रहा है कि नगर मेें करीब दस हजार यूरिया बोरियों के भंडारण की चर्चा है। चुपचाप 370 से 380 रुपये में खाद बिक्री कर खुली लूट की जा रही है किसान ओमकार निषाद का कहना है कि इफको यूरिया 380 रुपये की खाद प्राप्त हुई है और कैशमैमो नही दी गई है।
किसान पं. राघवेन्द्र सिंह, रामसिंह कहा कहना है कि मुझे प्राइवेट खाद 370 रुपये प्रतिबोरी यूरिया देकर कैशमैमो मांगने पर दुकान से धक्के मारकर भगाकर कहा गया है कि विभागीय अधिकारियों को पैसा देकर खाद मंगाई गई है और अतिशीघ्र 400 रुपये की यूरिया खाद प्रतिबोरी बेची जायेगी। आपको बता दे कि कुछ दिन पूर्व इफको व अन्य डीएपी 30 रुपये रेट से ऊपर महंगी रेट पर प्रतिबोरी बेची गई और जांच के नाम पर मात्र औपचारिकता पूर्ण किए जाने तथा पौश मशीनों तथा कैशमैमो चैक न किये जाने से खाद विक्रेताओं के हौसले बुलंद है। पता तो यह भी चला है कि किसानों की कृषि भूमि की फसलों में पानी लगने के बाद अब यूरिया खाद की बड़े पैमाने पर आवश्यकताा है इस कारण कालपी में हजारों बोरी यूरिया खाद की बिक्री है। अधिकारिक सूत्रों की माने तो इफको यूरिया 327 रुपये तक प्रतिबोरी बिक्री रेट है जबकि चापलूस खाद विक्रेताओं द्वारा खुलेआम 370 रुपये से 380 रुपये प्रतिबोरी 45 रुपये से 55 रुपये महंगे रेट पर प्रतिबोरी यूरिया खाद बिक्री कर किसानों से प्रतिदिन एक लाख रुपये से खुलेआम लूट की जा रही है इसे किसान अपना दुखद दुर्भाग्य मानने को विवश है।
इस संबंध में पंूछे जाने पर जिला कृषि अधिकारी राममिलन सिंह कहा स्पष्ट कहना है कि किसानों के उचित रेट पर खाद विक्रेता खाद की बिक्री करे और साथ में कैशमैमो भी किसानों को उपलब्ध कराये अन्यथा जेल जाने को तैयार रहे और किसी भी दिन गंभीरता से दुकानों की चैकिंग की जाएगी। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि खाद विक्रेताओं से विभाग में एक सिक्का भी रिश्वत नही ली जा रही है और विभाग को बदनाम करने वाले खाद विक्रेता अंजाम भुगतने को तैयार रहे। जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुसार नगर में कुछ खाद विक्रेताओं को पौश मशीन उपलब्ध कराई जा चुकी है और उन्हें संचालित करने के आदेश भी जारी किए जा चुके है। उन्होंने कहा कि इफको खाद की आवक और बिक्री भी उसी मशीन मे फीड होना आवश्यक है जिसकी अतिशीघ्र ही जांच करके सच्चाई का पता लगाया जा जायेगा और किसानों को हरहाल में उचित रेट पर खाद उपलब्ध कराने के विभाग कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद उपलब्ध कराने हेतु मैने जिलाधिकारी जालौन डा. मन्नान अख्तर से आदेश लेकर पांच हजार मीट्रिकटन इफको खाद मंगाकर पीसीएफ में भिजवाकर किसानों को उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किये है। जिसमें 4800 मीट्रिक खाद आ चुकी है और किसान पीसीएफ से संपर्क कर उचित रेट पर यूरिया खाद प्राप्त करे और प्राइवेट जो भी दुकानदार अधिक रेट पर खाद बिक्री करे उसकी तत्काल शिकायत करे।
यहां गौरतलब बात यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में किसानों के अतुलनीय योगदान के चलते भारत को कृषि प्रधान देश होने का गौरव प्राप्त है वहीं दूसरी ओर अर्थ व्यवस्था में भारी भरकम योगदान देने के बावजूद किसानों का आर्थिक एवं मानसिक, शारीरिक उत्पीड़न देश के लिए कलंक का कारण बनता जा रहा है। किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए बनाये गए कृषि विभाग तथा उनके सहयोगी विभागों द्वारा किसानों की ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की जगह जब किसानों को सुरक्षा व संरक्षण देने वाले विभागीय अधिकारी ही व्यापारियों से सुविधा शुल्क लेकर किसानों की राह में कांटे बोने का कार्य करे तो निश्चित ही किसान व कृषि दोनों ही दुष्यवस्था के चंगुल में छटपटाते हुए आत्महत्या करने को विवश हो जाएगे। यही हाल कालपी तहसील क्षेत्र के गांवों में हजारों किसानों का है। जिसमें नगर कालपी के समीप ग्राम देवकली, हीरापुर, मैनूपुर, कीरतपुर, शेखपुरगुढ़ा, गुढ़ाखास, मंगरौल, पड़री, नरहान, सरसेला, उसरगांव, मसगांव खैरई, बैरई समेत कई दर्जन गांवों के हजारों किसान खाद की महंगी किल्लत का शिकार होकर तड़प रहे है और यदि जिम्मेदार विभागीय अधिकारी गोपनीय तरीके उक्त गंभीर प्रकरण की जांच करले और खाद विक्रेताओं की कैशमैमो जो अधिकांश फर्जी तैयार की जाती है का मिलान कर ले तो पैरो तले से जमीन खिसक जायेगी और चैकाने वाले परिणाम आयेगे तथा खाद की इस महंगी बिक्री में तमाम ईमानदारी का चोला पहने वाले फंसते नजर आयेगे।
चापलूस खाद विक्रेताओं के पास कई लाईसेंस और गोदाम एक
विभागीय अधिकारियों की कृपा से नगर के कुछ खाद विक्रेताओं के पास आईएफडीसी खाद व प्राइवेट खादों के लाइसेंस अलग-अलग होने के बाद भी गोदाम मात्र एक होने के चर्चे नगर में जोरो पर है। चर्चा है कि खाद बिक्री हेतु विभागीय शासनादेश के अनुसार प्रत्येक उर्वरक खाद लाइसेंस हेतु प्रथम गोदाम होना आवश्यक है परन्तु कुछ चापलूस खाद विक्रेता जिनके पास खादों के कई ब्रांडो के लाइसेंस है लेकिन गोदाम सिर्फ एक ही है। चर्चा है कि विभागीय अधिकारी जो जिम्मेदार पदों पर आसीन है उनको यह सारी जानकारी के बाद भी उर्वरक खाद की नियमावली को बताये तो ताक पर रखकर सिर्फ धन कमाने की योजनाएं तैयार की जाती है और आज भी एक ही गोदाम में कई ब्रांडों की खादे रखकर उर्वरक नियमावली की धज्जियां उड़ाई जा रही है। चर्चा तो यह है कि कुछ चापलूस खाद विक्रेताओं के विरूद्ध किसान लूटने की जांच सत्य पाये जाने पर बीती वर्षो उनके लाईसेंस निलंबित तथा निरस्त भी हो चुके है परन्तु धन बल पर गंभीर मामले दफनकर विभाग द्वारा उन्हें किसानों की लूट हेतु पुनः लाइसेंस जारी कर दिए गए। चर्चा तो यह भी है कि यदि कालपी के खाद विके्रेताओं की एक दशक पुरानी बिक्री इतिहास की जांच कर ले तो नगर के खाद विक्रेताओं में भूचाल आ जायेगा। हालांकि कुछ समाजसेवी आरटीआई के जरिये उक्त मामले को खंगालने का मन बना चुके है जिससे किसानों की लूट हमेशा के लिए बंद हो सके।







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