उरई। अन्ना प्रथा को निष्प्रभावी करने के लिए मनरेगा के माध्यम से विभिन्न ग्रामों में चारागाह तैयार कराये जा रहे हैं। मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने जनपद में 29 चारागाह विकसित किये जाने की जानकारी दी है।

मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि मवेशियों द्वारा दूध देना बंद करने के बाद पशु पालक अपने स्तर पर चारे की व्यवस्था न कर पाने की वजह से उन्हें छुटटा छोड़ देते हैं। दूसरी ओर चारागाह लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं। जिससे अन्ना पशु खेतों में घुसकर लहलहाती फसल नष्ट करके किसानों की मेहनत बर्बाद कर देते हैं।

सरकार ने अन्ना पशु प्रथा पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाये हैं। इसी क्रम में चारागाहों को विकसित किया जाना भी शामिल है। पांच ब्लाकों में मनरेगा के तहत यह कार्य कराया जा रहा है। कोंच ब्लाॅक में चमारी, बस्ती और पचीपुरा कलां, कदौरा ब्लाक में बाबनी, परोसा, जमरोही, आटा और परासन, कुठौंद ब्लाक में बरियापुर व हदरुख, महेबा ब्लाक में बिनौरा और चरसौनी व डकोर ब्लाक में बम्हौरी कला, बरसार और अजनारी ग्राम पंचायतों में चारागाह, सुरक्षा खाई और मेड़बंदी के जरिये मवेशियों के चरने की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत 25.721 हैक्टेयर क्षेत्रफल को कवर किया गया है। उन्होंने आशा प्रकट की कि चारागाह बन जाने के बाद मवेशी मालिक पशुओं को छुटटा छोड़ने की बजाय इनमें उनके चरने की व्यवस्था करेगें जिससे खड़ी फसलों को होने वाला नुकसान बजाया जा सकेगा।

 

 

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