उरई। खेती का ग्लैमर बढ़ायेगीं किसानों के लिए आयोजित की जा रही पाठशालाएं। इसकी झलक गत 5 दिसम्बर से शनिवार तक चले किसान पाठशाला के पहले सत्र में नजर आई। पाठशाला में आने वाले किसानों में नवोन्मेष के बाद जबर्दस्त उत्साह का संचार देखा गया।

खेती में लगातार हो रहे घाटे से ग्रामीणों में इसके प्रति कुछ समय से ऊब बढ़ने लगी थी। बुंदेलखंड में कई छोटे किसान अपनी खेती नगद में उठाकर पानी पूड़ी जैसे धंधे के लिए सुदूर शहरों तक पलायन कर गये थे। तमाम छोटे गांवों में इसकी वजह से वीरानगी का आलम पैदा हो गया जहां बुजुर्गों के अलावा आबादी के नाम पर अन्य वय के लोग नदारत हो गये।

इस चिंतनीय स्थिति के बाद जागी सरकार ने खेती में नये सिरे से आकर्षण के संचार का बीड़ा उठाया है। इसी के तहत हर जिले में प्रत्येक न्याय पंचायत में दो ग्रामों में किसान पाठशाला लगाने की रूपरेखा बनायी गई है।

कुठौंद ब्लाॅक के जहटौली गांव की प्राथमिक पाठशाला में पांच दिन तक पहले सत्र का आयोजन हुआ। पहले दिन किसान पाठशाला में बमुश्किल आधा दर्जन किसानों ने भी आने की जहमत नही उठाई थी। लेकिन शनिवार को समापन क्लास में लगभग 90 किसान मौजूद थे। तकनीकी सहायक ज्ञानवेंद्र सिंह ने इन्हें आधुनिक तरीके से मुनाफादेय खेती करने की तरकीबें सिखाईं। साथ ही खाली समय में जुएं के लकड़ी संस्करण में समय जाया करने की बजाय कुक्कट पालन, सूकर पालन, मत्सय पालन आदि के माध्यम से अतिरिक्त कमाई की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी।

प्रधान श्याम सिंह ने बताया कि किसान पाठशाला में बीज शोधन और भूमि शोधन का महत्व जिस तरीके से बताया गया उससे किसान वाकई में आश्वस्त हुए हैं कि इन विधियों को अपनाकर अधिक और गुणवत्तापूर्ण उपज सुनिश्चित की जा सकती है। रामशंकर ने कहा कि फसल चक्र के बारे में किसान जागरूकता का परिचय नही देते। पांच दिन की क्लास में इस दिशा में किसानों को सोचने और गंभीर होने का अवसर मिला। दिनेश सिंह, रमेश खान और राजेंद्र पांडेय ने कहा कि कीट प्रकोप व अन्य व्याधियों से फसलों की भारी क्षति होती है जो खेती के ठाटे का कारण बन जाती है। कृषि रक्षा कार्य के बारे में किसान पाठशाला में इतनी अच्छी नसीहतें दी गईं कि अब हम लोग बहुत हद तक इनसे खेती को सुरक्षित कर पायेंगे।

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