
कोंच-उरई । यद्यपि अन्ना प्रथा समूचे बुंदेलखंड में एक ऐसी विकट समस्या है जिससे किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हैं और ये आवारा मवेशी फसलों के लिये काल बने हैं, लेकिन यह समस्या भी किसानों द्वारा ही पैदा की गई है जिसका हल उन्हें स्वयं निकालना होगा। समाज के सनातन धर्मावलंबी गाय और गोवंश को लेकर चिंता तो जताते हैं लेकिन उनके संरक्षण और संबद्र्घन के लिये कोई आगे नहीं आना चाहता है जिससे ये बेजुवान पशु भूखे मरने की नौबत पर आ गये हैं। यह बात तहसीलदार भूपाल सिंह ने यहां भारत माता मंदिर पर नुक्कड़ गोष्ठी के दौरान समाज सेवियों से चर्चा करते हुये कही।
उन्होंने यहां तहसील परिसर में इकट्ठा हो गये सैकड़ों की संख्या में गोवंशजों के लिये चारा पानी की व्यवस्था में लगे कतिपय नौजवानों की पहल की मुक्त कंठ से सराहना करते हुये कहा कि वह भी इस स्तुत्य कार्य में अपना योगदान देने को तैयार हैं लेकिन समाज के भले और सत्संगी लोगों को भी आगे आकर इस नेक कार्य में हाथ बटाना चाहिये। बुंदेली संस्कृति एवं लोक कला संबद्र्घन संस्थान के प्रबंधक पुरुषोत्तमदास रिछारिया तथा शिक्षक व रंगकर्मी संजय सिंघाल ने कहा कि इस समस्या का समाधान किसानों और गोपालकों के ही पास है, वे अपनी अपनी गायों को खूंटे से बांध कर उनकी देखभाल करें तभी इस समस्या से निजात मिल सकेगी। सरकार के स्तर से हालांकि तमाम वायदे किये जा रहे हैं लेकिन शायद ही कोई धरातल पर आकर समस्या का समाधान बन सके। उन्होंने भारत माता मंदिर पर जमा मवेशियों की देखभाल कर रहे नवयुवकों के हौसलों की सराहना करते हुये कहा कि वे अपने व्यस्त समय में से मवेशियों के लिये चारा पानी की व्यवस्था में लगे हैं, उनका साथ समाज के अन्य लोगों को भी देना चाहिये और गोग्रास के नाम पर उन्हें अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा जरूर निकालना चाहिये। मवेशियों की देखभाल कर रहे संगठन के नवीन कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने कुछ लोगों से इस पवित्र कार्य में हाथ बटाने का अनुरोध किया है जिसके सकारात्मक परिणाम भी मिल रहे हैं और लोग स्वेच्छा से इन मूक जानवरों की सेवा हेतु अपना योगदान देने के लिये प्रस्तुत हो रहे हैं। इस दौरान ऋषि झा, राहुल राठौर, हरिश्चंद्र तिवारी लौना आदि ने भी अपने सुझाव दिये।






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