कोंच(उरई )। भारतीय जनता पार्टी की केंद्र व प्रदेश में सरकार होने के बाद भी शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार होता नही दिख रहा है हालत यह है कि कोई भी जिम्मेदार अफसर इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है यहां काशीराम कालोनी में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए बनाए गए मल्टी स्टोरी विद्यालय की इमारत तो खड़ी है पर यहां पर सुविधाओं का टोटा है हालत यह कि वहां पर समस्याये ही समस्याएं दिखाई दे रही है इस स्कूली इमारत में बच्चों के लिए उनके क्लास रूमो में फर्नीचर आदि की व्यवस्था न होने के कारण पंजीकृत छात्र ऐसी भीषण सर्दी में फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हो रहे है और तो और विधालय में शासन की अतिमहत्वाकांक्षी योजना मिडडे मिल योजना का सही ढंग से क्रियान्वित नही हो सकी और पढ़ने वाले बच्चे मिडडे मिल की योजना को कोषने पर मजबूर है इस सम्बंध में हमारी मीडिया की टीम ने वहां कार्यरत सहायक अध्यापक प्रियंका कुशवाहा से विद्यालय की व्यवस्था की जानकारी की तो बताया गया है कि यह मल्टी विधालय का लोकार्पण सितम्बर 2017 में क्षेत्रीय भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा के मुख्य आतिथ्य में और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश साही एंव नगर शिक्षा अधिकारी सतीश कमल की मौजूदगी में किया गया था और इस मल्टी विधालय को भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा ने गोद लेकर विकास की बात कही थी लेकिन चार माह बीत जाने के बाद इस मल्टी विधालय की हालत बद से बदतर है वहा पढ़ने वाले बच्चों को पीने वाले पानी की समस्या से परेशान होना पड़ रहा है साथ ही इमारत तो बन गयी लेकिन विधालय में सुरक्षा की दृष्टि से कोई बाउंड्री नही है जिस कारण से बच्चे एंव विधालय स्टाफ अपने को असुरक्षित महसूस समझ रहा है भारी गन्दगी के बीच विधालय में कार्यरत शिक्षकों द्वारा खुद अपने हाथों से सफाई की जा रही है जबकि इस विद्यालय में सुविधाओं का भंडार होना चाहिए था लेकिन यहा पर समस्याओं का भंडार है आसपास के रहने बाले गरीब लोगों ने बताया कि इस विधालय को भाजपा सांसद ने गोद लिया तो यहां पर सारी सुविधाएं होनी चाहिए थी और कई समस्याएं यहां रुलाने का काम कर रही है शायद भाजपा सांसद को इस विधालय की याद भूल गयी है या हो सकता कि इस विधालय पर नजर न पढ़ी हो फिलहाल इस विधालय में न तो कोई बोर्ड लगा है नही हैंडपम्प और बच्चे फर्नीचर के लिए तरस रहे है एम डी एम के खाने के लिए बच्चे बढ़ी आशा के साथ आस लगाए है और नगर क्षेत्र के अंतर्गत आने बाले इस विधालय समस्याओं के कारण रोने को मजबूर है।







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