कदौरा(उरई )। कदौरा क्षेत्र ग्रामीणांचल में किसी मां ने अपनी ममता को फुटपाथ पर जीने मरने के लिए छोड़ दिया राहगीर मजदूर को मिली बिलखती नवजात को उठाकर लिया गया एवं उसके लालन पालन का संकल्प कर गोद लिया गया।

ज्ञातव्य हो कि थाना कदौरा क्षेत्र ग्राम बसरेही मार्ग पर लकड़ी काटने जा रहे मजदूर को किसी खाई से नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी जिससे मजदूर ने जाकर देखा कि खाई में कपड़े में लिपटा बच्चा पड़ा था जिसे कोई फेंक गया था मजदूर खुश होकर उक्त बेटी को अपने घर ग्राम पण्डौरा ले आया एवं उसके लालन पालन का जिम्मा भी लिया वही उक्त बच्ची को देख ग्रामीणों ने सराहनीय कदम कहते हुए फूलसी खूबसूरत बेटी को देने के लिए मजदूर से कहा लेकिन उक्त मजदूर ने ममत्व दिखाते हुए किसी को भी बेटी देने से इंकार करते हुए खुद बेटी को पालने की बात की गयी।

वही प्रेस वार्ता में मजदूर दम्पत्ति लक्ष्मी व् श्रीराम ने कहा कि बच्चे भगवान का रूप होते है हमारे तीन बच्चे है सुमित, अमित, अंकित जिनका लालन पालन हम मजदूरी कर करते है हमारे कोई बेटी नही थी जिसका पालन पोषण कर उसे मां बाप का नाम देंगे वही उक्त मजदूर के सराहनीय कार्य को लेकर ग्रामीणों ने हौसलाफजाई की एव खूबसूरत बच्ची को देने के लिए भी कहा गया लेकिन मोहिल मजदूर ने बेटी को देने से इंकार कर दिया। वही नवजात बेटी को फेंकने वाली माँ ने आखिर ममता को फिर किन्ही कारणों वष तार तार कर दिया जिसने फूल जैसी बेटी को जन्म तो दिया लेकिन लोक लाज के भय से उसे फुटपाथ पर जीने मरने के लिए छोड़ दिया आखिर क्या माँ की ममता भी फरेब हो सकती है जिसने समाज में ममता को भी शर्मशार होने पर मजबूर कर दिया।

 

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